प्रॉम्प्ट से आगे निकला एआई अब लूप इंजीनियर्स की मांग में आया जबरदस्त उछाल
By: Team Aapkisaheli | Posted: 27 July, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में काम करने का तरीका बहुत तेजी से बदल रहा है। शुरुआती दौर में जब चैटजीपीटी लोकप्रिय हुआ था तब प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का बोलबाला था। लोग एआई से सही जवाब पाने के लिए सटीक निर्देश लिखना सीख रहे थे। अब एआई टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि बाजार में एआई एजेंट्स और लूप इंजीनियरिंग की मांग सबसे ज्यादा हो गई है। इसे आईटी सेक्टर की सबसे हॉट जॉब माना जा रहा है जिसमें सालाना पैकेज करोड़ों तक पहुंच रहा है।
प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और लूप इंजीनियरिंग में सबसे बड़ा अंतर काम करने के तरीके का है। प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग में इंसान को हर कदम पर एआई को लिखकर निर्देश देना पड़ता है। यह एक बार में एक ही काम करता है। वहीं दूसरी तरफ लूप इंजीनियरिंग में एक ऐसा ऑटोमैटिक सिस्टम तैयार किया जाता है जहां एआई खुद काम शुरू करता है। वह अपनी गलतियां खुद पहचानता है और सही नतीजा मिलने तक बिना रुके प्रोसेस को दोहराता रहता है।
दोनों करियर के लिए अलग-अलग योग्यता की जरूरत होती है। प्रॉम्प्ट इंजीनियर बनने के लिए कोडिंग की खास जरूरत नहीं होती है। इसके लिए अच्छी भाषा शैली लॉजिकल सोच और एआई को सही निर्देश देने की कला काफी है। इसे कुछ महीनों के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स से सीखा जा सकता है। लूप इंजीनियर बनने के लिए कोडिंग और सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग की मजबूत समझ होनी चाहिए। इसके लिए पाइथन लंगचेन और एआई आर्किटेक्चर जैसे एडवांस कोर्स करने होते हैं।
कमाई और सैलरी के मामले में भी दोनों में बड़ा अंतर है। प्रॉम्प्ट इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत चार से आठ लाख रुपये सालाना पैकेज से होती है जो अनुभव के साथ बारह से पंद्रह लाख रुपये तक पहुंच जाती है। लूप इंजीनियर की शुरुआती सैलरी ही दस से अठारह लाख रुपये सालाना होती है। तीन से पांच साल का अनुभव रखने वाले लूप इंजीनियर्स को आसानी से पच्चीस लाख से पचास लाख रुपये या उससे अधिक का पैकेज मिल जाता है।
अगर आपकी भाषा और लेखन पर अच्छी पकड़ है तो प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग आपके लिए बेहतर शुरुआत है। यदि आपको कोडिंग और एआई सिस्टम डिजाइन करना पसंद है तो लूप इंजीनियरिंग भविष्य का सबसे मजबूत विकल्प है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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