बच्चे को हर चीज में परफेक्ट बनाने की कोशिश पड़ सकती है भारी, पैरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान
By: Team Aapkisaheli | Posted: 10 Sep, 2026
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई से लेकर खेल, व्यवहार और दूसरी एक्टिविटीज में अच्छा करे। बच्चे की छोटी-बड़ी उपलब्धियां देखकर खुशी होना भी स्वाभाविक है, लेकिन कई बार इसी चाहत में पैरेंट्स उससे हर चीज में परफेक्ट होने की उम्मीद करने लगते हैं। बच्चा अगर नंबर कम ले आए, किसी काम में पीछे रह जाए या दूसरों की तरह अच्छा प्रदर्शन न कर पाए तो उसे बार-बार सुधारने की कोशिश की जाती है। धीरे-धीरे यह उम्मीद बच्चे के लिए दबाव बन सकती है। उसे लगने लगता है कि गलती करना या हारना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे माहौल में बच्चा अपनी पसंद से ज्यादा माता-पिता की उम्मीदों के हिसाब से काम करने लगता है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करें, लेकिन हर कदम पर परफेक्शन की उम्मीद न रखें।
बच्चे की कमजोरी को उसकी पहचान न बनने देंअगर बच्चा किसी विषय में कमजोर है या किसी एक्टिविटी में बार-बार गलती करता है तो उसे उसी कमी से पहचानना सही नहीं है। बार-बार ‘तुम इसमें अच्छे नहीं हो’ जैसे शब्द बच्चे के मन में बैठ सकते हैं और उसका आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है। इसके बजाय उसे यह समझाने की कोशिश करें कि हर व्यक्ति की कुछ खूबियां और कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनमें उसे ज्यादा अभ्यास की जरूरत पड़ती है। एक विषय में परेशानी का मतलब यह नहीं कि बच्चा हर चीज में कमजोर है। उसकी दूसरी खूबियों को भी पहचानें और उन्हें सामने लाएं।
अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ बच्चे पर न डालेंकई बार माता-पिता अनजाने में अपनी पुरानी इच्छाएं बच्चे से पूरी करवाना चाहते हैं। अगर वे खुद कोई खेल, डांस, म्यूजिक या करियर नहीं चुन पाए तो बच्चे से उसी दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद करने लगते हैं। लेकिन बच्चे की अपनी पसंद और क्षमता अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक्टिविटी में डालने से पहले उसकी रुचि जानना जरूरी है। वह जिस चीज में दिलचस्पी दिखाता है, उसे समझने और आजमाने का मौका दें। हर बच्चे का रास्ता अलग होता है और यही उसकी पहचान को मजबूत बनाता है।
गलती के बाद तुरंत समाधान देने के बजाय उससे सीखने देंपरफेक्ट बनाने की कोशिश में पैरेंट्स बच्चे की हर गलती को तुरंत ठीक करने लगते हैं। होमवर्क में गलती हुई तो खुद जवाब बता दिया, प्रोजेक्ट में कमी दिखी तो खुद सुधार दिया या किसी प्रतियोगिता में हारने पर तुरंत कारण समझाने लगे। इससे बच्चा धीरे-धीरे अपनी गलतियों से सीखने की प्रक्रिया से दूर हो सकता है। सुरक्षित परिस्थितियों में उसे अपनी गलती पहचानने और दोबारा कोशिश करने का अवसर दें। जरूरत पड़ने पर सवाल पूछकर उसे सोचने में मदद करें, लेकिन हर समस्या का हल खुद देने से बचें।
हर उपलब्धि के साथ अगला लक्ष्य तय न करेंबच्चे ने अच्छे नंबर हासिल किए, प्रतियोगिता जीती या कोई काम शानदार किया तो उस पल को उसके साथ खुशी से सेलिब्रेट करना भी जरूरी है। हर सफलता के तुरंत बाद यह कहना कि ‘अब इससे भी ज्यादा करना है’ बच्चे को लगातार प्रदर्शन करने के दबाव में डाल सकता है। उसे यह महसूस होने दें कि उसकी मेहनत और उपलब्धि अपने आप में खास है। कभी-कभी बिना किसी अगले लक्ष्य की चर्चा किए सिर्फ उसकी खुशी में शामिल होना बच्चे को यह एहसास देता है कि माता-पिता उसे सिर्फ उसके प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि उसके होने के लिए भी स्वीकार करते हैं।
बच्चे को अपनी गति से आगे बढ़ने की जगह देंहर बच्चा एक ही उम्र में एक जैसी चीजें नहीं सीखता। कोई जल्दी पढ़ना सीख सकता है तो किसी को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। किसी को लोगों के सामने बोलना पसंद होगा तो कोई पहले चुपचाप चीजों को समझना चाहेगा। लगातार दूसरे बच्चों की गति से उसकी तुलना करने के बजाय उसकी अपनी प्रगति पर ध्यान दें। छोटे सुधारों को पहचानना और धैर्य रखना ज्यादा जरूरी है। बच्चे को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उसे आगे बढ़ने के लिए समय मिल सकता है और हर बार सबसे आगे रहना जरूरी नहीं है।
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