शादी के कुछ साल बाद फीका पड़ने लगता है रिश्ता? ऐसे वापस लाएं प्यार और अपनापन
By: Team Aapkisaheli | Posted: 10 Sep, 2026
शादी के शुरुआती सालों में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं, छोटी-छोटी बातों पर खुश होते हैं और हर दिन में एक-दूसरे के लिए जगह निकाल लेते हैं। लेकिन समय के साथ काम, घर की जिम्मेदारियां, परिवार और रोज की भागदौड़ के बीच रिश्ते में वही गर्माहट कम महसूस होने लगती है। इसका मतलब यह नहीं कि प्यार खत्म हो गया है, बल्कि कई बार उसे जताने और महसूस करने के तरीके पीछे छूट जाते हैं। रिश्ता भी बाकी चीजों की तरह ध्यान मांगता है। अगर आपको लगता है कि बातचीत कम हो गई है या साथ रहते हुए भी दूरी महसूस होती है, तो कुछ छोटी आदतों से फिर से अपनापन लौटाया जा सकता है। जरूरी है कि दोनों एक-दूसरे को समझने और रिश्ते को समय देने की कोशिश करें।
एक-दूसरे को नए सिरे से जानने की कोशिश करेंशादी के कुछ साल बाद अक्सर हमें लगता है कि हम अपने पार्टनर को पूरी तरह जान चुके हैं। लेकिन इंसान और उसकी पसंद-नापसंद समय के साथ बदलती रहती है। इसलिए कभी आराम से बैठकर पूछें कि आजकल उन्हें क्या पसंद आ रहा है, किस चीज की चिंता है या वह भविष्य में क्या करना चाहते हैं। ऐसी बातचीत रिश्ते में एक नई जिज्ञासा पैदा करती है और पार्टनर को महसूस होता है कि उसकी जिंदगी आज भी आपके लिए मायने रखती है।
रोजमर्रा में छोटे सरप्राइज की जगह बनाएंरिश्ते में प्यार हमेशा बड़े गिफ्ट या महंगे डेट प्लान से नहीं लौटता। कभी उनकी पसंद की चाय बना देना, बिना किसी खास वजह के उनकी पसंद की चीज घर ले आना या काम के बीच एक प्यारा सा मैसेज भेज देना भी काफी असरदार हो सकता है। ऐसी छोटी कोशिशें रोजमर्रा की जिंदगी में उत्साह लेकर आती हैं और पार्टनर को यह एहसास कराती हैं कि रिश्ते में प्यार अभी भी उतना ही मौजूद है।
साथ में कुछ नया करने की आदत डालेंजब पति-पत्नी की जिंदगी सिर्फ घर, ऑफिस और जिम्मेदारियों के बीच घूमने लगे तो रिश्ता भी एक जैसी दिनचर्या में फंस सकता है। इससे बचने के लिए समय-समय पर साथ में कुछ नया करें। कोई नई जगह घूमना, साथ खाना बनाना, कोई फिल्म देखना, पौधे लगाना या कोई छोटा सा शौक शुरू करना रिश्ते में नए अनुभव जोड़ सकता है। साथ में बिताया ऐसा समय पुरानी यादों के साथ नई यादें बनाने का मौका देता है।
नाराजगी को जमा करने के बजाय सही समय पर बात करेंकई बार छोटी-छोटी नाराजगी इसलिए बड़ी दूरी बन जाती है क्योंकि पति-पत्नी उसे समय पर बोल नहीं पाते। मन में बात जमा करने या हर बार नजरअंदाज करने के बजाय शांत माहौल में अपनी परेशानी बताना बेहतर है। बातचीत का मकसद यह साबित करना नहीं होना चाहिए कि कौन सही है, बल्कि यह समझना होना चाहिए कि सामने वाला क्या महसूस कर रहा है। जब दोनों बिना डर और आरोप के अपनी बात रख पाते हैं, तो रिश्ते में भावनात्मक दूरी कम होने लगती है।
रिश्ते में ‘हम’ के साथ ‘मैं’ की भी जगह रखेंकभी-कभी शादी के बाद अपनी पसंद, दोस्तों, शौक और निजी समय को पूरी तरह पीछे छोड़ देना भी रिश्ते को बोझिल बना सकता है। पति-पत्नी का साथ जरूरी है, लेकिन दोनों का अपना व्यक्तित्व और निजी स्पेस भी उतना ही जरूरी है। जब व्यक्ति अपनी पसंद की चीजों के लिए थोड़ा समय निकालता है और फिर खुशी से पार्टनर के साथ जुड़ता है, तो रिश्ते में घुटन के बजाय ताजगी बनी रहती है। प्यार को मजबूत बनाने के लिए साथ चलना जरूरी है, लेकिन एक-दूसरे को अपनी जगह देना भी उतना ही जरूरी है।
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