Parenting Tips: बच्चे से रोज पूछें ये एक सवाल, बढ़ेगा उसका आत्मविश्वास और आपसे होगा मजबूत रिश्ता
By: Team Aapkisaheli | Posted: 27 Aug, 2026
पेरेंटिंग में अक्सर माता-पिता का ध्यान बच्चे की पढ़ाई, खाने-पीने और अनुशासन पर ज्यादा रहता है। लेकिन बच्चे के मन में क्या चल रहा है, वह किस बात से खुश या परेशान है, इसे समझने के लिए उससे खुलकर बातचीत करना भी उतना ही जरूरी है। कई बच्चे अपनी भावनाएं सीधे शब्दों में नहीं बता पाते। ऐसे में रोजाना कुछ मिनट निकालकर उनसे एक आसान सवाल पूछा जा सकता है। “आज तुम्हारे दिन की सबसे अच्छी और सबसे मुश्किल बात क्या रही?” यह छोटा-सा सवाल बच्चे को अपनी बातें साझा करने का मौका देता है और उसे महसूस कराता है कि उसकी भावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। धीरे-धीरे यह आदत माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसे को मजबूत बना सकती है।
बच्चे को सिर्फ जवाब नहीं, अपनी बात कहने का मौका देंअक्सर हम बच्चों से बस इतना पूछते हैं कि स्कूल कैसा था या होमवर्क पूरा हुआ या नहीं। इन सवालों का जवाब ज्यादातर “ठीक था” या “हां” में खत्म हो जाता है। लेकिन जब आप बच्चे से उसके दिन की सबसे अच्छी और मुश्किल बात पूछते हैं, तो उसे थोड़ा सोचकर अपनी भावनाएं और अनुभव बताने का मौका मिलता है। हो सकता है वह किसी दोस्त की मदद करने की खुशी बताए या फिर स्कूल में हुई किसी ऐसी बात का जिक्र करे, जिसने उसे परेशान किया हो। इससे माता-पिता को भी बच्चे की दुनिया को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है।
जवाब सुनते समय तुरंत सलाह देने की जल्दी न करेंकई बार बच्चा अपनी परेशानी बताता है और माता-पिता तुरंत उसे समझाने या गलती बताने लगते हैं। इससे बच्चा अगली बार अपनी बात छिपाने लग सकता है। जब बच्चा कुछ शेयर करे, तो पहले उसकी बात पूरी सुनें। बीच में बार-बार टोकने या तुरंत फैसला सुनाने से बचें। आप उससे पूछ सकती हैं, “तुम्हें उस समय कैसा लगा?” या “तुम क्या करना चाहते हो?” इस तरह बच्चा अपनी भावनाओं को पहचानना और उनके बारे में सोचकर बात करना सीख सकता है। जरूरत पड़ने पर प्यार से मार्गदर्शन जरूर दें।
हर दिन की छोटी उपलब्धियों की करें तारीफबच्चे की “सबसे अच्छी बात” हमेशा परीक्षा में अच्छे नंबर या कोई बड़ी उपलब्धि ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। हो सकता है उसने किसी की मदद की हो, पहली बार कोई नया काम किया हो या अपनी किसी गलती को सुधारने की कोशिश की हो। इन छोटी बातों को भी नोटिस करके उसकी कोशिश की तारीफ करें। इससे बच्चा केवल रिजल्ट पर नहीं, बल्कि प्रयास और अच्छे व्यवहार पर भी ध्यान देना सीखता है। तारीफ करते समय सिर्फ “बहुत अच्छे” कहने की बजाय यह बताएं कि आपको उसकी कौन-सी बात अच्छी लगी।
मुश्किल अनुभवों को सीख में बदलने में करें मददअगर बच्चा दिन की कोई बुरी या मुश्किल घटना बताए, तो उसे तुरंत छोटा समझकर नजरअंदाज न करें। बच्चे के लिए छोटी लगने वाली बात भी उस समय बड़ी परेशानी हो सकती है। पहले उसकी भावनाओं को समझें, फिर शांत होकर पूछें कि ऐसी स्थिति दोबारा आने पर क्या किया जा सकता है। इससे बच्चा हर समस्या से डरने के बजाय उसके समाधान के बारे में सोचना सीख सकता है। ध्यान रखें कि हर परेशानी को माता-पिता को खुद हल करने की जरूरत नहीं है। कई बार बच्चे को सोचने का मौका देना भी जरूरी होता है।
इस छोटी आदत से बनेगा भरोसे का मजबूत रिश्तारोजाना कुछ मिनट की बातचीत किसी भी महंगे खिलौने या बड़ी एक्टिविटी से ज्यादा कीमती हो सकती है। सोने से पहले या डिनर के समय बच्चे के साथ बिना मोबाइल के बैठकर बात करने की आदत बनाएं। **जब बच्चे को यह भरोसा होता है कि उसकी खुशी, परेशानी और राय को घर में सुना जाता है, तो वह अपने माता-पिता से खुलकर बात करने में ज्यादा सहज महसूस कर सकता है।पेरेंटिंग का यह छोटा-सा तरीका बच्चे को समझने और उसके साथ एक मजबूत, भरोसेमंद रिश्ता बनाने में मदद कर सकता है।
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