1 of 1 parts

बदलती उम्र के साथ कैसे नए रंग लेती है दोस्ती

By: Team Aapkisaheli | Posted: 08 Aug, 2026

बदलती उम्र के साथ कैसे नए रंग लेती है दोस्ती
​इंसान की जिंदगी में रिश्ते तो कई होते हैं लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं। जैसे-जैसे इंसान उम्र के अलग-अलग पड़ावों से गुजरता है वैसे-वैसे इस रिश्ते के मायने जरूरतें और स्वरूप भी बदलते चले जाते हैं। बचपन के बेफिक्र पलों से शुरू होकर परिपक्वता के दौर तक दोस्ती का यह सफर हर मोड़ पर एक नया अहसास देता है।


​मासूमियत और बेफिक्री का दौर



बचपन की दोस्ती किसी भी तरह के स्वार्थ औपचारिकता या दिखावे से परे होती है। इस उम्र में दोस्त बनाने के लिए किसी खास वजह की जरूरत नहीं होती। टिफिन बांटना एक साथ डांट खाना या खिलौनों के लिए लड़कर फिर एक हो जाना इस दौर की पहचान है। बचपन के साथी हमें बिना किसी फिल्टर के स्वीकार करते हैं क्योंकि वे हमारी कमियों और खूबियों दोनों को बखूबी जानते हैं।



​सपनों और जिम्मेदारियों का तालमेल


कॉलेज और करियर के शुरुआती दिनों में मिलने वाले दोस्त हमारी महत्वाकांक्षाओं और संघर्षों के साथी बनते हैं। इस उम्र में दोस्ती का आधार साझा लक्ष्य करियर का तनाव और भविष्य की योजनाएं होती हैं। यहाँ दोस्त एक-दूसरे के मार्गदर्शक बनते हैं और मुश्किल दौर में मानसिक संबल प्रदान करते हैं।



​समझदारी और स्पेस की कद्र



उम्र बढ़ने और पेशेवर जिंदगी में व्यस्त होने के बाद दोस्ती में ठहराव आ जाता है। अब हर रोज बातें होना या बार-बार मिलना जरूरी नहीं रह जाता। परिपक्व उम्र की दोस्ती में एक-दूसरे के बिजी शेड्यूल और प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाता है। यहाँ रोज की बातचीत से ज्यादा एक-दूसरे पर विश्वास और जरूरत के वक्त साथ खड़े रहने की भावना अहम होती है।



​जड़ों से जुड़ाव और नए नजरिए का संगम



जीवन के हर चरण में बने दोस्तों का अपना एक अलग महत्व है। पुराने और बचपन के दोस्त इंसान को उसकी मूल जड़ों से जोड़े रखते हैं और बीते दिनों की याद दिलाते हैं। वहीं जिंदगी के नए पड़ाव पर बनने वाले मित्र व्यक्ति को बदलते दौर के साथ ढलने नया नजरिया अपनाने और व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने में मदद करते हैं।​दोस्ती का रूप भले ही समय के साथ बदल जाए लेकिन इसकी गर्माहट और अहसास हमेशा एक समान बना रहता है।



हेमलता शर्मा जयपुर

#गोरापन पल भर में...अब आपके हाथों में


Friendship and Age, Friendship Through Different Ages, Changing Friendship With Age, Friendship Journey, Friendship in Childhood

Mixed Bag

News

खेलो इंडिया योजना पैरा स्पोर्ट के लिए गेम-चेंजर बन सकती है : तीरंदाज शीतल देवी
खेलो इंडिया योजना पैरा स्पोर्ट के लिए गेम-चेंजर बन सकती है : तीरंदाज शीतल देवी

Ifairer


Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0