भाई बहन के कड़वे रिश्ते में मिठास घोल रही सिबलिंग थैरेपी जानिए कैसे दोबारा कायम होगा सालों पुराना अटूट भरोसा
By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Sep, 2026
भाई बहन का रिश्ता दुनिया का सबसे अनूठा और गहरा नाता माना जाता है। बचपन का साथ खिलौनों के लिए नोकझोंक और बड़े होकर एक दूसरे की सबसे बड़ी ताकत बनना इस रिश्ते की खूबसूरती है। लेकिन समय के साथ अक्सर इस प्यार भरे बंधन में कड़वाहट आ जाती है। बचपन की अनकही बातें आपस में तुलना संपत्ति के विवाद या माता पिता की देखभाल की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे इस मजबूत रिश्ते में दरार डाल देते हैं । ऐसी ही दूरियों को खत्म करने के लिए आजकल सिबलिंग थैरेपी एक वरदान की तरह उभर रही है।
क्या है सिबलिंग थैरेपी और कैसे करती है काम
सिबलिंग थैरेपी वास्तव में फैमिली थैरेपी का ही एक आधुनिक हिस्सा है इसमें एक पेशेवर काउंसलर भाई बहनों को एक साथ बिठाकर उनकी समस्याओं को समझता है। यह प्रक्रिया किसी एक को सही या गलत ठहराने के लिए नहीं बल्कि रिश्ते को सुधारने के लिए होती है। थैरेपी के दौरान दोनों पक्षों को बिना किसी डर या झिझक के अपनी भावनाएं व्यक्त करने का पूरा मौका मिलता है जिससे सालों पुरानी जमी गलतफहमी की बर्फ पिघलने लगती है।
सिबलिंग थैरेपी के सबसे बड़े फायदे
संवाद का बेहतर होना: थैरेपी का सबसे मुख्य उद्देश्य बातचीत के रास्ते खोलना है लोग एक दूसरे को ध्यान से सुनना और सामने वाले के नजरिए को समझना सीखते हैं।
भावनात्मक सुरक्षा: अगर बचपन में किसी पक्षपात या अनदेखी का एहसास हुआ हो तो थैरेपी में उस पर खुलकर बात करके पुरानी कड़वाहट मिटाई जाती है।
पूरे परिवार पर सकारात्मक असर: जब भाई बहनों का रिश्ता सुधरता है तो घर का तनाव अपने आप खत्म हो जाता है और पूरे परिवार में खुशहाली लौट आती है।
रिश्ते को नई जिंदगी देने वाले विशेष टिप्स
अगर आप भी अपने भाई या बहन के साथ रिश्ते में दूरियां महसूस कर रहे हैं तो इन आसान टिप्स को आजमा सकते हैं
नो पास्ट रूल: जब भी नए मुद्दे पर बात करें तो पुरानी गलतियों या बचपन की बातों को बीच में न लाएं।
चाय पर चर्चा: हफ्ते में कम से कम एक बार साथ बैठें और उस दौरान केवल एक दूसरे की तारीफ या अच्छी पुरानी यादों को साझा करें।
सीमाओं का सम्मान: एक दूसरे की निजी जिंदगी और फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल देने से बचें और सम्मान बनाए रखें।
हेमलता शर्मा जयपुर
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