1 of 1 parts

Health Tips: रोज पेट फूलना सिर्फ गैस नहीं, हो सकता है बड़ी बीमारी का संकेत

By: Team Aapkisaheli | Posted: 06 Mar, 2026

Health Tips: रोज पेट फूलना सिर्फ गैस नहीं, हो सकता है बड़ी बीमारी का संकेत
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। कई लोग पेट फूलने को मामूली गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि हमारा पाचन तंत्र शरीर का अहम आधार है। जब आंतें बार-बार संकेत दें, तो उन्हें समझना जरूरी है। लगातार होने वाला ब्लोटिंग यानी पेट फूलना शरीर का एक ऐसा ही संकेत हो सकता है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। 
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एसिडिटी और ब्लोटिंग एक जैसी नहीं होतीं, हालांकि कई बार दोनों साथ दिखाई दे सकती हैं। एसिडिटी में सीने में जलन, खट्टे डकार या ऊपरी पेट में जलन महसूस होती है। वहीं, ब्लोटिंग में पेट में भारीपन, दबाव या सूजन जैसा एहसास होता है। 

विज्ञान के अनुसार, यह गैस बनने के कारण हो सकता है। आयुर्वेद की भाषा में इसे अग्नि यानी पाचन शक्ति के कमजोर होने और वात के बढ़ने से जोड़ा जाता है। जब पाचन ठीक से नहीं होता तो अधपचा भोजन गैस बनाता है और पेट फूलने लगता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कभी-कभार ज्यादा खाना, तला-भुना भोजन, देर रात खाना या ठंडे पेय लेने के बाद पेट फूलना सामान्य है, लेकिन चिंता तब होती है जब यह रोज की समस्या बन जाए। 

अगर हर दिन खाने के बाद पेट फूलता है, पेट दर्द होता है, कब्ज या दस्त साथ में होते हैं, जल्दी पेट भर जाता है या बिना कारण वजन कम होने लगता है तो ये संकेत गंभीर हो सकते हैं। मेडिकल इसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, मेटाबॉलिक गड़बड़ी या हार्मोनल असंतुलन से जोड़कर देखती है। हार्मोन और थायरॉयड की भूमिका भी अहम है। जब थायरॉयड कम काम करता है तो आंतों की गति धीमी हो जाती है और कब्ज व गैस की समस्या बढ़ सकती है। 

महिलाओं में पीरियड्स या पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में पानी रुक सकता है और पेट भारी लग सकता है। तनाव भी बड़ी वजह है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हमारा दिमाग और आंतें आपस में जुड़े होते हैं। जब हम तनाव में होते हैं तो आंतों की गति और वहां मौजूद अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं। आयुर्वेद भी मन और शरीर के इस संबंध को मानता है और कहता है कि चिंता वात को बढ़ाती है, जिससे गैस और सूजन बढ़ सकती है। 

ऐसे में सवाल उठता है कि कब जांच करानी जरूरी है। अगर ब्लोटिंग दो से तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे, भूख कम हो जाए, नींद खराब हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जांच में आमतौर पर खून की जांच की जाती है, जिसमें थायरॉयड और एनीमिया की जांच शामिल हो सकती है। जरूरत पड़ने पर मल परीक्षण, अल्ट्रासाउंड या एंडोस्कोपी जैसी जांच भी की जा सकती है। 

#तिल मस्सों से हमेशा की मुक्ति के लिए 7 घरेलू उपाय


Digestion, Bloating, Science, Ayurveda, Intestines, Signals, Wellness,

Mixed Bag

News

NIEPMD में 120 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर कनिमोझी ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र, दखल देने की मांग
NIEPMD में 120 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर कनिमोझी ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र, दखल देने की मांग

Ifairer


Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0