1 of 1 parts

कैसा होना चाहिए आपका भोजन? आयुर्वेद से जानें संतुलित स्वाद का महत्व

By: Team Aapkisaheli | Posted: 05 Mar, 2026

कैसा होना चाहिए आपका भोजन? आयुर्वेद से जानें संतुलित स्वाद का महत्व
नई दिल्ली। आयुर्वेद में भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं है, बल्कि यह शरीर को पोषण देने, ऊर्जा देने और शरीर के संतुलन को बनाए रखने का माध्यम भी माना गया है, इसलिए भोजन को महाभैषज्य (सर्वोत्तम औषधि) भी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर हमारा आहार सही और संतुलित है, तो कई बीमारियों से हम अपने-आप ही बचे रह सकते हैं। इसलिए हमें यह समझना जरूरी है कि हम क्या खा रहे हैं, कितना खा रहे हैं और किस तरह खा रहे हैं। 
आयुर्वेद में कहा गया है कि हमारे रोज के भोजन में छह तरह के स्वाद यानी मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) स्वाद उचित मात्रा में होने चाहिए। इसे षड्रस कहा जाता है। जब हम इन सभी स्वादों को संतुलित मात्रा में लेते हैं, तो शरीर के तीनों दोष (वात, पित्त और कफ) संतुलित रहते हैं। 

उदाहरण के लिए, मीठा स्वाद शरीर को ताकत देता है और शरीर के ऊतकों को पोषण देता है। खट्टा स्वाद भूख बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाता है। नमकीन स्वाद भोजन को स्वादिष्ट बनाता है और शरीर में तरलता बनाए रखता है। इसी तरह, तीखा स्वाद पाचन को तेज करता है और शरीर में जमा कफ को कम करता है। कड़वा स्वाद शरीर को साफ करने में मदद करता है और खून को शुद्ध करता है, जबकि कसैला स्वाद शरीर को ठंडक देता है और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। 

आयुर्वेद यह भी कहता है कि किसी भी स्वाद का ज्यादा सेवन नुकसानदेह हो सकता है। जैसे अगर हम बहुत ज्यादा मीठा खाते हैं, तो मोटापा, सुस्ती और मधुमेह जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बहुत ज्यादा नमक खाने से बाल जल्दी सफेद हो सकते हैं और शरीर में सूजन भी आ सकती है। इसी तरह बहुत ज्यादा तीखा या मसालेदार भोजन पित्त को बढ़ा सकता है और पेट से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम हर स्वाद को संतुलित मात्रा में लें। आयुर्वेद भोजन की मात्रा पर भी खास जोर देता है। 

कहा जाता है कि पेट को तीन हिस्सों में बांटना चाहिए। दो हिस्से ठोस भोजन के लिए और एक हिस्सा तरल के लिए और एक हिस्सा खाली छोड़ना चाहिए ताकि भोजन आसानी से पच सके। अगर हम जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, तो पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 


#आसान Totka अपनाएं अपार धन-दौलत पाएं...


Ayurveda, Mahabhaishajya, food as medicine, body balance, nourishment, conscious eating, balanced diet, holistic health, preventive wellness, Ahara, dietary habits,

Mixed Bag

Ifairer


Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0