पब्लिक में बच्चों पर चिल्लाना सुधार की जगह बिगाड़ सकता है उनका भविष्य
By: Team Aapkisaheli | Posted: 13 May, 2026
अक्सर देखा गया है कि जब माता-पिता किसी सार्वजनिक स्थान जैसे बाजार मॉल या पार्क में होते हैं तो वे अपनी थकान और हड़बड़ी के कारण बच्चों की छोटी-छोटी शरारतों पर आपा खो बैठते हैं। उस समय बच्चे को जोर से डांटने या उस पर चिल्लाने से वह चुप तो हो जाता है लेकिन इसके मनोवैज्ञानिक परिणाम काफी गहरे हो सकते हैं।
क्यों खतरनाक है सबके सामने डांटनाघर की चारदीवारी में समझाना और बाहर सबके सामने चिल्लाने में बहुत फर्क है। जब कोई बच्चा पब्लिक प्लेस पर अपमानित महसूस करता है तो उसके मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उसे लगने लगता है कि उसके अपने ही माता-पिता उसके खिलाफ हैं। इससे बच्चा धीरे-धीरे सामाजिक स्थितियों में जाने से कतराने लगता है जिसे सोशल एंग्जायटी कहा जाता है।
बच्चों के व्यक्तित्व पर होने वाले दुष्प्रभावबार-बार सार्वजनिक अपमान झेलने वाला बच्चा खुद को दूसरों से कमतर आंकने लगता है। उसे हर नया काम करने में डर लगता है कि कहीं उससे गलती न हो जाए। डांट का असर दो तरह से हो सकता है। या तो बच्चा बहुत ज्यादा डरपोक और चुपचाप रहने वाला बन जाता है या फिर वह खुद भी गुस्सैल और जिद्दी हो जाता है। बच्चे अपने बड़ों को देखकर सीखते हैं। अगर आप उन पर चिल्लाते हैं तो वे यह सीख जाते हैं कि दूसरों से अपनी बात मनवाने या गुस्सा जाहिर करने का यही एकमात्र तरीका है।
गुस्से को कैसे करें नियंत्रितजब भी आपको लगे कि बच्चा सार्वजनिक स्थान पर परेशान कर रहा है और आपको गुस्सा आ रहा है तो इन बातों पर ध्यान दें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय गहरी सांस लें। इससे आपका दिमाग शांत होगा और आप चिल्लाने के बजाय सोच-समझकर कदम उठा पाएंगे। बच्चे को डांटने के बजाय उसके पास झुककर उसकी आंखों में आंखें डालकर धीरे से समझाएं।
शारीरिक निकटता और शांत आवाज बच्चे को अधिक प्रभावित करती है। अगर कभी आप अनजाने में बच्चे पर चिल्ला दें तो बाद में उससे बात करें। उसे बताएं कि आप थके हुए थे इसलिए ऐसा हुआ। इससे बच्चा माफी मांगना और भावनाओं को समझना सीखता है।
पेरेंटिंग केवल अनुशासन नहीं बल्कि एक सुरक्षित वातावरण देने का नाम है। आपकी एक छोटी सी मुस्कान और धैर्यपूर्ण व्यवहार बच्चे के भविष्य को संवार सकता है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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