घर में शेर और बाहर चुप ऐसा क्यों होता है बच्चों का व्यवहार
By: Team Aapkisaheli | Posted: 12 May, 2026
अक्सर माता पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा घर में तो पूरे आसमान को सिर पर उठा लेता है लेकिन बाहर निकलते ही या किसी मेहमान के सामने आते ही एकदम सहम जाता है। कई बार हम इसे आत्मविश्वास की कमी मान लेते हैं लेकिन मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो यह हमेशा कमजोरी नहीं होती। इसके पीछे कुछ गहरे और जायज कारण हो सकते हैं जिन्हें समझना हर पेरेंट के लिए जरूरी है।
सुरक्षा का अहसास और नया माहौलबच्चे के लिए उसका घर दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह है। यहाँ उसे पता है कि उसे कोई जज नहीं करेगा और वह जैसा है वैसा रह सकता है। वहीं दूसरी ओर स्कूल या कोई सामाजिक समारोह उसके लिए एक अनजानी चुनौती जैसा होता है। नए चेहरों और शोर-शराबे के बीच बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करने के लिए थोड़ा समय लेता है। यह उसका एक सुरक्षा तंत्र है डर नहीं।
समझने और परखने की आदतहर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। कुछ बच्चे सोशल बटरफ्लाई होते हैं, तो कुछ ऑब्जर्वर यानी परखने वाले होते हैं। ऐसे बच्चे पहले माहौल को दूर से देखते हैं, लोगों के व्यवहार को समझते हैं और जब उन्हें लगता है कि सब ठीक है तब वे धीरे-धीरे घुलना-मिलना शुरू करते हैं। इसे शुरुआती हिचकिचाहट कहना ज्यादा सही होगा।
कब चिंता करना जरूरी हैअगर आपका बच्चा घर के बाहर बिल्कुल भी नहीं बोल पा रहा है और यह सिलसिला महीनों से चल रहा है, तो यह सिलेक्टिव म्यूटिज्म का संकेत हो सकता है। इसमें बच्चा चाहकर भी कुछ खास जगहों पर बोल नहीं पाता। अगर उसकी यह चुप्पी उसकी पढ़ाई या दोस्तों के साथ रिश्तों में बाधा बन रही है तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।
माता पिता के लिए कुछ काम की बातेंअगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बाहर भी आत्मविश्वास के साथ रहे तो इन बातों पर गौर करें:
शर्मीला लेबल न लगाएं कभी भी दूसरों के सामने यह न कहें कि मेरा बच्चा बहुत शर्मीला है। ऐसा कहने से बच्चा खुद को वैसा ही मानने लगता है।
दबाव न डालेंउसे किसी से बात करने या कविता सुनाने के लिए मजबूर न करें। उसे अपनी गति से सहज होने दें।
प्रयासों की सराहना करेंअगर वह किसी को सिर्फ हेलो भी कह दे तो उसकी तारीफ करें। इससे उसका हौसला बढ़ता है।
रोल मॉडल बनेंबच्चे आपको देखकर सीखते हैं। जब वे आपको दूसरों से सहजता से बात करते देखते हैं तो वे भी धीरे-धीरे वही सीखते हैं।
याद रखें कि हर बच्चा अपने आप में खास है। प्यार और सही सहयोग के साथ वे वक्त आने पर अपनी झिझक को पीछे छोड़ना सीख ही जाते हैं।
हेमलता शर्मा जयपुर
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