Relationship : शादी के 7 वचन सिर्फ रस्म नहीं सफल वैवाहिक जीवन के सीक्रेट फॉर्मूले हैं, जानिए इनका असली मतलब
By: Team Aapkisaheli | Posted: 01 May, 2026
हिंदू विवाह में अग्नि के सामने लिए जाने वाले सात फेरे और सात वचन महज एक परंपरा नहीं हैं बल्कि ये एक सुखी वैवाहिक जीवन का मजबूत आधार स्तंभ होते हैं। इन वचनों में छिपे संदेशों को अगर आज के दौर में भी गहराई से समझा जाए तो पति और पत्नी का रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ेगा। शादी के इन वचनों का अर्थ और उनकी प्रासंगिकता नीचे दी गई है।
पहला वचनः इस वचन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि जीवन के किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान में पति अपनी पत्नी को हमेशा साथ रखेगा। यह साथ केवल घर तक सीमित न रहकर आध्यात्मिक यात्राओं और सत्कर्मों में भी बराबर की भागीदारी की बात करता है।
दूसरा वचनः शादी के बाद लड़की अपना घर छोड़कर आती है इसलिए दूसरे वचन में पति यह वादा करता है कि वह अपनी पत्नी के माता पिता का भी उतना ही सम्मान और आदर करेगा जितना वह अपने खुद के माता पिता का करता है। यह वचन दो परिवारों को आपस में प्रेम और सम्मान के धागे से जोड़ता है।
तीसरा वचनः यह वचन जीवन भर साथ निभाने की गारंटी की तरह है। इसमें पति अपनी पत्नी को भरोसा दिलाता है कि वह जवानी से लेकर बुढ़ापे तक जीवन की हर अवस्था और हर मोड़ पर उसका सहारा बनेगा और कभी उसका साथ नहीं छोड़ेगा।
चौथा वचनः घर और गृहस्थी को चलाने के लिए जिम्मेदारियां उठाना बहुत जरूरी है। चौथे वचन में पति यह प्रतिज्ञा करता है कि वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने और घर के सभी दायित्वों को निभाने में हमेशा आगे रहेगा और अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।
पांचवा वचनः किसी भी मजबूत रिश्ते की बुनियाद आपसी समझ होती है। इस वचन के अनुसार पति घर के आर्थिक फैसलों और महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी पत्नी की राय को महत्व देगा। इससे पत्नी को परिवार में बराबरी का दर्जा मिलता है और आपसी तालमेल बढ़ता है।
छठा वचनः सम्मान किसी भी रिश्ते की जान होता है। छठे वचन में पति यह वचन देता है कि वह दूसरों के सामने या समाज में अपनी पत्नी का कभी अनादर नहीं करेगा। साथ ही वह बुरी आदतों और गलत संगत से दूर रहकर अपने चरित्र और परिवार की मर्यादा को बनाए रखेगा।
सातवां वचनः यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण वचन वफादारी का है। इसमें पति यह शपथ लेता है कि वह अपनी पत्नी के प्रति पूरी तरह ईमानदार रहेगा और उसके अलावा किसी अन्य स्त्री के प्रति मन में गलत भाव नहीं रखेगा। यह वचन आपसी विश्वास को अटूट बनाता है।
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