ऑफ द ग्रिडः क्यों अब पहाड़ों में वेकेशन नहीं सुकून ढूंढ रहे हैं लोग
By: Team Aapkisaheli | Posted: 15 Mar, 2026
आज की भागदौड़ भरी लाइफ में सुबह अलार्म बजने से लेकर रात को सोने से पहले आखिरी रील देखने तक हमारा दिमाग 24 घंटे ऑन रहता है। शायद यही वजह है कि अब लोग छुट्टियों में आलीशान होटल्स या शॉपिंग मॉल्स जाने के बजाय ऐसी जगहों पर जाना पसंद कर रहे हैं जहाँ नो नेटवर्क का बोर्ड लगा हो। इस नए ट्रेंड को नाम दिया गया है डिजिटल डिटॉक्स।
नोटिफिकेशन से ब्रेक की ज़रूरतः
शहर की भीड़भाड़ और ऑफिस के व्हाट्सएप ग्रुप्स की पिंग पिंग से दूर भागने की चाहत अब एक जरूरत बन गई है। दिल्ली मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के युवा अब वर्केशन के बजाय ब्लैक आउट वेकेशन चुन रहे हैं। इसका मतलब है ऐसी जगह जहाँ न वाई-फाई हो और न ही मोबाइल सिग्नल।
क्या है यह स्लो लिविंगः
यह ट्रेंड केवल घूमने तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका बन रहा है। लोग अब
सुबह उठकर सबसे पहले फोन देखने के बजाय पौधों को पानी देना या बालकनी में चाय पीना पसंद कर रहे हैं। हैंडमेड चीज़ों और मिट्टी के बर्तनों का क्रेज़ फिर से लौट रहा है। पॉडकास्ट सुनने के बजाय लोग शांति में किताबें पढ़ना ज्यादा सुकूनदेह मान रहे हैं।
छोटे बदलाव बड़ा असरः
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हफ्ते में सिर्फ एक दिन नो गैजेट डे रखने से मानसिक तनाव में 30 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है। लोग अब मल्टीटास्किंग के जाल से निकलकर एक समय में एक ही काम पर फोकस करने की अहमियत समझ रहे हैं।
एक दिलचस्प बातः हिमाचल और उत्तराखंड के कई होमस्टे अब डिजिटल डिटॉक्स पैकेज दे रहे हैं जहाँ चेक इन के वक्त आपका फोन एक लॉकर में जमा कर दिया जाता है ताकि आप असली दुनिया से जुड़ सकें। यह बदलाव दिखाता है कि हम तकनीक से थक चुके हैं और अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं। आखिर सादगी ही वह असली लग्जरी है जिसे हम सब ढूंढ रहे हैं।
#लडकों की इन 8 आदतों से लडकियां करती हैं सख्त नफरत