बच्चे की हर जिद पूरी करना प्यार नहीं, कई बार यही आदत बना देती है उसे जिद्दी
By: Team Aapkisaheli | Posted: 15 Sep, 2026
माता-पिता अपने बच्चे को खुश देखने के लिए उसकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं। बच्चे की छोटी-सी जिद पर खिलौना खरीद देना, उसकी पसंद का खाना बनाना या रोने पर तुरंत उसकी बात मान लेना उस समय भले ही प्यार जैसा लगे, लेकिन लंबे समय में यह आदत बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। जब बच्चे को हर बार बिना मेहनत या इंतजार किए अपनी बात मनवाने की आदत हो जाती है, तो उसके लिए ‘ना’ सुनना मुश्किल हो सकता है। धीरे-धीरे वह छोटी-छोटी बातों पर जिद, गुस्सा और रोने का सहारा लेने लगता है। इसलिए बच्चे की हर मांग पूरी करने के बजाय उसे प्यार के साथ सही और गलत के बीच अंतर समझाना जरूरी है। इससे बच्चा जिम्मेदार, समझदार और भावनात्मक रूप से मजबूत बनना सीखता है।
हर जिद पूरी करने से बच्चा क्या सीखता है?जब बच्चे की हर जिद तुरंत पूरी कर दी जाती है, तो उसके मन में यह धारणा बन सकती है कि रोने, चिल्लाने या जिद करने से उसकी बात मान ली जाएगी। अगली बार अपनी इच्छा पूरी करवाने के लिए वह उसी व्यवहार को दोहरा सकता है। धीरे-धीरे जिद उसका तरीका बन सकती है। इसलिए हर मांग पर तुरंत हां कहने के बजाय माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे की जरूरत क्या है और मांग सिर्फ इच्छा है या वास्तव में जरूरी चीज। बच्चे को यह सिखाना जरूरी है कि हर चीज तुरंत मिलना संभव नहीं होता।
प्यार करें, लेकिन हर बात पर हां न कहेंबच्चे को अनुशासन सिखाना प्यार कम करना नहीं है। माता-पिता प्यार से बच्चे की बात सुन सकते हैं, उसकी भावना को समझ सकते हैं, लेकिन गलत मांग को स्वीकार करना जरूरी नहीं। अगर बच्चा किसी चीज के लिए जिद कर रहा है और वह उसके लिए उचित नहीं है, तो शांत तरीके से ‘नहीं’ कहें और कारण भी बताएं। बार-बार अपना फैसला बदलने से बच्चा समझ सकता है कि ज्यादा रोने या जिद करने पर माता-पिता मान जाएंगे। इसलिए नियम बनाएं और उन्हें लगातार एक जैसा बनाए रखें।
बच्चे को इंतजार करना और धैर्य रखना सिखाएंहर चीज तुरंत उपलब्ध होने की आदत बच्चे में धैर्य की कमी पैदा कर सकती है। इसलिए छोटी उम्र से ही उसे इंतजार करना सिखाना अच्छा है। अगर बच्चा किसी खिलौने की मांग करता है तो हर बार तुरंत खरीदने के बजाय उसे किसी खास अवसर तक इंतजार करवाया जा सकता है। इसी तरह उसकी हर इच्छा उसी समय पूरी करने के बजाय उसे समझाएं कि कुछ चीजें बाद में मिलेंगी। इससे बच्चा अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और इंतजार करना सीखता है। यह आदत आगे चलकर उसके व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता में भी मदद कर सकती है।
रोने पर तुरंत मांग पूरी करने से बचेंबच्चे का रोना माता-पिता के लिए भावनात्मक रूप से मुश्किल हो सकता है। कई बार शांति बनाए रखने के लिए माता-पिता तुरंत उसकी मांग मान लेते हैं। लेकिन अगर हर बार ऐसा होता है, तो बच्चा रोने को अपनी बात मनवाने के तरीके के रूप में इस्तेमाल करना सीख सकता है। ऐसी स्थिति में पहले बच्चे को शांत करें और उसकी भावना को स्वीकार करें, लेकिन केवल रोने की वजह से गलत मांग पूरी न करें। उसे बताएं कि रोने या चिल्लाने के बजाय वह अपनी बात शब्दों में बताए।
सही-गलत समझने का मौका देंबच्चे को सिर्फ चीजें देना ही पालन-पोषण नहीं है। उसे यह समझाना भी जरूरी है कि हर इच्छा जरूरी नहीं होती और हर फैसले का कोई न कोई परिणाम होता है। उम्र के अनुसार घर के छोटे कामों में उसकी मदद ली जा सकती है और अच्छे व्यवहार पर उसकी प्रशंसा की जा सकती है। जब बच्चा समझता है कि चीजें मेहनत, इंतजार और जिम्मेदारी से भी जुड़ी हैं, तो उसमें आत्मनिर्भरता और अनुशासन विकसित होने लगता है। माता-पिता का प्यार तब सबसे ज्यादा असरदार होता है, जब उसमें स्नेह के साथ सही सीमाएं और अच्छी सीख भी शामिल हो।
#गोपी बहू कितना ग्लैमर अवतार देखकर चौंक जाएंगे आप!