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Health Tips : बार-बार हिचकी आने की वजह है डायफ्राम की समस्या, जानें राहत पाने के घरेलू उपाय

By: Team Aapkisaheli | Posted: 11 Jun, 2026

Health Tips : बार-बार हिचकी आने की वजह है डायफ्राम की समस्या, जानें राहत पाने के घरेलू उपाय
हैल्थ डेस्क। नई दिल्ली 

हिचकी एक ऐसी समस्या है जो लगभग हर व्यक्ति ने कभी न कभी जरूर महसूस की होगी। कई बार खाना खाते समय या अचानक हंसने-रोने जैसी स्थिति में हिचकी शुरू हो जाती है। आमतौर पर यह कुछ मिनटों में अपने आप बंद हो जाती है, लेकिन कभी-कभी यह लंबे समय तक बनी रहती है और व्यक्ति को असहज कर देती है। 
जयपुर के वरिष्ठ होम्यो चिकित्सक डॉ.  एन. सी. पंवार के अनुसार, हिचकी का संबंध शरीर की एक महत्वपूर्ण मांसपेशी डायफ्राम से होता है। डायफ्राम फेफड़ों के नीचे मौजूद एक मांसपेशी है, जो सांस लेने की प्रक्रिया में मदद करती है। जब यह मांसपेशी अचानक सिकुड़ जाती है, तो स्वर तंत्र के पास मौजूद रास्ता तुरंत बंद हो जाता है। इसी वजह से हिक जैसी आवाज निकलती है, जिसे हम हिचकी कहते हैं। इसे रोकने के कई आसान घरेलू उपाय हैं। 

डॉ. पंवार बताते हैं कि ठंडा पानी धीरे-धीरे पीना हिचकी रोकने का सबसे सरल तरीका है। जब ठंडा पानी गले से होकर नीचे जाता है, तो यह वहां मौजूद नसों को संकेत देता है। इससे दिमाग को नया संदेश मिलता है और हिचकी पैदा करने वाला अनियंत्रित चक्र टूट जाता है। खास बात यह है कि पानी को एक बार में गटकने की बजाय छोटे-छोटे घूंट में पीना अधिक लाभदायक माना जाता है। इससे गले और डायफ्राम के बीच तालमेल दोबारा सामान्य होने में मदद मिलती है। इसके अलावा, कुछ सेकंड के लिए सांस रोकना भी काफी आसान तरीका है। 

डॉ. पंवार के अनुसार, जब व्यक्ति गहरी सांस लेकर थोड़ी देर तक उसे रोकता है, तो शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा थोड़ी बढ़ जाती है। यह बदलाव दिमाग को डायफ्राम की गतिविधि को नियंत्रित करने का संकेत देता है, जिससे हिचकी रुक सकती है। शहद का सेवन भी कुछ लोगों के लिए राहत देने वाला उपाय है। शहद गले की अंदरूनी सतह पर एक परत बना देता है। इससे गले की नसों को आराम मिलता है और हिचकी पैदा करने वाले संकेत कम होते हैं। 

इसके अलावा, शहद में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो गले को शांत रखने में मदद करते हैं। वहीं मुंह में थोड़ी मात्रा में चीनी रखने से हिचकी रुक सकती है। इसके पीछे वजह यह मानी जाती है कि चीनी के छोटे-छोटे दाने मुंह और गले की नसों को एक नया संवेदनात्मक संकेत देते हैं। जब दिमाग का ध्यान इस नए संकेत की ओर जाता है, तो हिचकी पैदा करने वाला रिफ्लेक्स कमजोर पड़ जाता है। हालांकि डायबिटीज के मरीजों को यह उपाय अपनाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

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