बच्चों को बचपन से ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के चार प्रभावी तरीके
By: Team Aapkisaheli | Posted: 22 Apr, 2026
बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर हर माता-पिता के मन में दो बड़ी चिंताएं होती हैं पहली उनकी सेहत और दूसरी उनकी खुशहाली। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं एक तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण चिंता सामने आती है और वह है पैसा। आर्थिक समझ की कमी बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ब्रिटेन में हुए एक हालिया सर्वे के अनुसार दस में से सात अभिभावक अपने बच्चों के वित्तीय भविष्य को लेकर परेशान रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही पैसों की अहमियत समझाना उनके जीवन पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के व्यवहारिक अर्थशास्त्र विशेषज्ञ डैन एरीली के अनुसार पैसों की कोई स्पष्ट सीमा न होने के कारण बच्चों के लिए इसके भविष्य के महत्व को समझना कठिन होता है। इस समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञों ने चार मुख्य सुझाव दिए हैं।
दीर्घकालिक निवेश और बैंक खाते का महत्व: बच्चों के नाम पर लंबी अवधि के लिए निवेश करना एक समझदारी भरा कदम है। अभिभावक बैंक में बच्चों के लिए दो तरह के खाते खुलवा सकते हैं एक सामान्य बचत खाता और दूसरा सावधि जमा यानी एफडी। विशेषज्ञों का कहना है कि बचत खाते की तुलना में लंबी अवधि के खातों पर अधिक ब्याज मिलता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से बात करें और उन्हें बताएं कि यह पैसा भविष्य में उनकी यूनिवर्सिटी फीस या अन्य बड़े खर्चों के लिए है। इससे बच्चों में सुरक्षा की भावना पैदा होती है।
धीरे-धीरे बचत की आदत डालना: वर्तमान में छोटी-छोटी बचत करना भविष्य के लिए किसी बड़े उपहार से कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न हो तब भी कम राशि से शुरुआत की जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि फिजूलखर्ची के लिए कर्ज या क्रेडिट कार्ड का सहारा न लें। बच्चों को इस पूरी प्रक्रिया में शामिल करने से वे पैसे के वास्तविक मूल्य को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ: चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंड इंटरेस्ट को दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाता है। यह आपकी छोटी सी बचत को कई गुना बढ़ा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि आप 10000 रुपये 5 प्रतिशत सालाना ब्याज पर जमा करते हैं तो पांच साल बाद यह राशि बिना कुछ अतिरिक्त किए 12760 रुपये हो जाएगी। शर्त यह है कि मूलधन और ब्याज को निकाला न जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि आप बस थोड़ा-थोड़ा बचाएं बाकी का काम गणित खुद कर देगा।
गुल्लक के जरिए शुरुआती सीख: बच्चों को पैसे की अहमियत सिखाने का सबसे सरल तरीका उन्हें एक गुल्लक खरीद कर देना है। इससे बच्चे सीखते हैं कि पैसा कोई खिलौना नहीं है और इसे सुरक्षित रखना जरूरी है। गुल्लक के माध्यम से उन्हें सिक्कों और नोटों की अलग-अलग वैल्यू समझ आती है। साथ ही बच्चों को पॉकेट मनी देना भी एक अच्छी शुरुआत हो सकती है जिससे वे खुद के खर्चों का प्रबंधन करना सीखते हैं।
अभिभावकों द्वारा किए गए ये छोटे प्रयास बच्चों को न केवल आर्थिक रूप से साक्षर बनाएंगे बल्कि उनके भविष्य को भी सुरक्षित और समृद्ध करेंगे।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
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