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बच्चों के बोलने का अंदाज खोलेगा दिमागी सेहत के राज स्टैनफोर्ड की नई रिसर्च में बड़ा खुलासा

By: Team Aapkisaheli | Posted: 03 Aug, 2026

बच्चों के बोलने का अंदाज खोलेगा दिमागी सेहत के राज स्टैनफोर्ड की नई रिसर्च में बड़ा खुलासा
​ क्या आपका बच्चा बातें करते समय और लेकिन या इसलिए जैसे शब्दों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा या अलग ढंग से करता है अगर हाँ तो थोड़ा सतर्क हो जाइए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिससे बच्चों के भविष्य में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी दिमागी समस्याओं में घिरने का पहले ही पता लगाया जा सकेगा| ​अब तक माना जाता था कि बच्चा क्या बोल रहा है यह ज्यादा मायने रखता है| लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है| नया अध्ययन बताता है कि बच्चा क्या बोल रहा है उससे कहीं ज्यादा जरूरी यह है कि वह कैसे बोल रहा है| यानी उसके वाक्य बनाने का तरीका और शब्दों को आपस में जोड़ने की शैली उसकी दिमागी सेहत का आईना बनती है|

​AI पकड़ेगा भाषा के महीन संकेत
​प्रसिद्ध साइंस जर्नल नेचर मेंटल हेल्थ में प्रकाशित इस स्टडी में 9 से 13 साल के करीब 200 से अधिक बच्चों को शामिल किया गया| शोधकर्ताओं ने उनके जीवन के अनुभवों और तनाव से जुड़ी बातों का लगभग डेढ़ घंटे तक इंटरव्यू लिया|
​इसके बाद इन इंटरव्यूज़ को एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग NLP मॉडल्स के जरिए परखा गया| परिणाम हैरान कर देने वाले थे| AI मॉडल्स ने बच्चों के बात करने के तरीके को समझकर यह सटीक अनुमान लगा लिया कि अगले छह वर्षों में किन बच्चों को मानसिक तनाव या एंग्जायटी का सामना करना पड़ सकता है|

​आखिर शब्दों के जोड़ में ऐसा क्या छिपा है
​रिसर्च के मुख्य लेखक चेस एंटोनैकी के अनुसार बच्चा किसी घटना का जिक्र करते समय किन छोटे-छोटे जोड़ने वाले शब्दों जैसे- से तक और लेकिन का उपयोग किस लय में कर रहा है, वह उसके अवचेतन मन की स्थिति को दर्शाता है|
​जोखिम के संकेत: जिन बच्चों की बातचीत में गंभीर तनाव घरेलू हिंसा या दोस्तों से अलग-थलग रहने के अनुभव ज्यादा दिखे, उनमें भविष्य में मानसिक बीमारी का खतरा अधिक पाया गया|
​सुरक्षा चक्र: इसके उलट जिन बच्चों की बातों में खेलकूद स्कूल एक्टिविटीज परिवार और दोस्तों के साथ का जिक्र ज्यादा था, उनका मानसिक स्वास्थ्य काफी मजबूत पाया गया|

​क्यों खास है यह नई तकनीक
​अब तक बच्चों की मानसिक स्थिति को जांचने के लिए महंगे मेडिकल टेस्ट कॉर्टिसोल तनाव हार्मोन की जांच या लंबी मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ता था| यह आम लोगों की पहुंच से दूर और काफी खर्चीला माध्यम था| लेकिन भविष्य में यह तकनीक बेहद सस्ती और आसान साबित हो सकती है| आने वाले समय में सिर्फ स्मार्टफोन पर रिकॉर्ड की गई बच्चे की सामान्य बातचीत को AI के जरिए एनालाइज किया जा सकेगा| इससे किसी बीमारी के बढ़ने से पहले ही बच्चे की पहचान कर उसे सही काउंसलिंग दी जा सकेगी|
हेमलता शर्मा जयपुर

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