2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन देने से क्यों घट रही है बोलने की क्षमता जानिए विशेषज्ञ की राय
By: Team Aapkisaheli | Posted: 04 Aug, 2026
आजकल के समय में रोते हुए बच्चे को चुप कराने का सबसे आसान तरीका फोन थमाना बन गया है। माता-पिता अक्सर काम में व्यस्त होने या बच्चे की जिद के आगे झुककर उसे मोबाइल स्क्रीन दिखा देते हैं। कुछ ही सेकंड में बच्चा शांत भी हो जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आसान सा दिखने वाला तरीका बच्चे के दिमागी और भाषा के विकास के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता हैहाल ही में हुई रिसर्च और विशेषज्ञों के अध्ययन से यह साफ हुआ है कि 2 साल से कम उम्र के शिशुओं के लिए किसी भी तरह का स्क्रीन टाइम बेहद नुकसानदेह है।भाषा सीखने में देरी और बातचीत से दूरीजीवन के शुरुआती दो साल बच्चे के दिमाग के विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। इस दौरान बच्चा अपने आसपास मौजूद लोगों की आवाजें सुनकर उनके चेहरे के हाव-भाव देखकर और चीजों को छूकर बोलना सीखता है। जब बच्चे को इस उम्र में मोबाइल दिया जाता है तो उसका ध्यान असली दुनिया से हटकर स्क्रीन पर सिमट जाता है।इसके कारण कई बच्चों में बोलना सीखने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। वे मम्मी या पापा जैसे बुनियादी शब्द बोलने में भी काफी समय लगा देते हैं। स्क्रीन की आदत बच्चे को अपनों से बातचीत करने के बजाय एक काल्पनिक दुनिया से जोड़ देती है।भावनात्मक लगाव पर असरशोधकर्ताओं का मानना है कि जो बच्चे रोने या चिड़चिड़ाने पर मोबाइल देखकर शांत होते हैं, उनका अपने माता-पिता के साथ भावनात्मक जुड़ाव कमजोर होने लगता है। बच्चा शांत होने के लिए मां-बाप के स्पर्श और दुलार के बजाय स्क्रीन की तलाश करने लगता है।शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावज्यादा स्क्रीन टाइम का असर केवल बोलने या भावना तक सीमित नहीं है बल्कि इसके कई अन्य गंभीर शारीरिक नुकसान भी हैं:नींद में रुकावट: फोन की लाइट और रंग-बिरंगे वीडियो बच्चे की नींद के पैटर्न को पूरी तरह बिगाड़ देते हैं।आंखों पर दबाव: लगातार स्क्रीन देखने से छोटी उम्र में ही आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।शारीरिक विकास में कमी: बाहर खेलने या दौड़ने-भागने के मौके कम मिलने से बच्चे का शारीरिक विकास रुक जाता है जिससे आगे चलकर मोटापे की समस्या हो सकती है।इस उम्र में बच्चे को वास्तव में क्या चाहिएडिजिटल दौर में स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहना कठिन लग सकता है, लेकिन 2 साल से छोटे बच्चों को फोन देना किसी भी तरह सही नहीं है। इस उम्र में बच्चों को मोबाइल नहीं बल्कि अपने माता-पिता का समय उनके साथ खेल कहानियां और प्यार भरा स्पर्श चाहिए। यही चीजें उनके मानसिक और भावनात्मक विकास को सही दिशा देती हैं।हेमलता शर्मा जयपुर
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