बच्चों को डांटना छोड़ें इन 5 सीक्रेट ट्रिक्स से खेल-खेल में टॉपर बनेगा आपका बच्चा
By: Team Aapkisaheli | Posted: 10 July, 2026
आज के माता-पिता की सबसे बड़ी टेंशन यही है कि बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है। लाख कोशिशों और डांट-फटकार के बाद भी बच्चे किताबों से दूर भागने के बहाने ढूंढते रहते हैं। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो पुरानी आदतों को बदलिए और इन पांच असरदार और प्रैक्टिकल तरीकों को आजमाकर देखिए जिससे आपका बच्चा खुद खुशी-खुशी पढ़ने बैठेगा।
सिर्फ 10 मिनट का जादुई फॉर्मूलाजब बच्चा पढ़ने के नाम से ही मुंह बनाने लगे तो उसे लंबी पढ़ाई का डर मत दिखाइए। उसे प्यार से कहें कि तुम्हें बस दस मिनट ही पढ़ना है और उसके बाद पढ़ाई बंद। असल में किसी भी काम को शुरू करने में ही सबसे ज्यादा आलस आता है। एक बार जब बच्चा दस मिनट के लिए बैठ जाता है तो उसका दिमाग धीरे-धीरे उस विषय में रम जाता है और वह खुद ही आधे से एक घंटे तक पढ़ लेता है।
सिलेबस को बनाएं छोटा और आसानएक साथ बहुत सारा होमवर्क या पूरा चैप्टर सामने देखकर बच्चे पहले ही हार मान लेते हैं। समझदारी इसी में है कि आप उनके लिए छोटे-छोटे टारगेट तय करें। जैसे उन्हें कहें कि अभी सिर्फ पांच गणित के सवाल करने हैं या सिर्फ एक पैराग्राफ के नोट्स बनाने हैं। छोटे लक्ष्य आसानी से पूरे होते हैं जिससे बच्चों का हौसला और कॉन्फिडेंस दोनों बढ़ता है।
नो-फोन ज़ोन और डिजिटल डिटॉक्सआज के दौर में पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया बन चुका है। पढ़ाई के दौरान हर थोड़ी देर में बजने वाली रिंगटोन या नोटिफिकेशन बच्चे का ध्यान पूरी तरह भटका देती है। इसलिए नियम बनाएं कि पढ़ाई के समय मोबाइल फोन पूरी तरह साइलेंट रहेगा और उसे बच्चे की नजरों से दूर दूसरे कमरे में रखा जाएगा ताकि पूरा फोकस सिर्फ किताबों पर रहे।
25 मिनट पढ़ाई और 5 मिनट का पावर ब्रेकबच्चों का दिमाग बड़ों की तुलना में जल्दी थकता है इसलिए उन्हें लगातार घंटों तक बैठाकर रखना समझदारी नहीं है। इसके लिए आप पोमोडोरो तकनीक का इस्तेमाल करें जिसमें बच्चे को पच्चीस से तीस मिनट तक पूरी एकाग्रता से पढ़ाएं और फिर पांच मिनट का एक छोटा सा ब्रेक दें। इस ब्रेक में बच्चे को थोड़ा घूमने-फिरने पानी पीने या हल्की स्ट्रेचिंग करने को कहें ताकि उनका दिमाग फिर से तरोताजा हो जाए।
तारीफ और छोटे-छोटे सरप्राइजइंसानी दिमाग तारीफ और इनाम मिलने पर ज्यादा बेहतर काम करता है। जब बच्चा आपके दिए गए छोटे टारगेट को पूरा कर ले तो उसकी खुलकर तारीफ करें और उसे कोई छोटा सा सरप्राइज या उसकी पसंदीदा चीज़ इनाम में दें। यह तरीका बच्चे के भीतर एक पॉजिटिव मोटिवेशन जगाता है और वह अगली बार खुद से पढ़ाई करने के लिए आगे आता है।
पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह: इन पांच तरीकों के साथ-साथ यह भी ध्यान रखें कि बच्चे की तुलना कभी किसी दूसरे बच्चे से न करें। पढ़ाई का एक निश्चित समय तय करें। घर का माहौल शांत रखें और बच्चे को सात से आठ घंटे की भरपूर नींद लेने दें।
हेमलता शर्मा जयपुर
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