Parenting Tips: बच्चे की परवरिश में प्यार के साथ इन बातों का रखें ध्यान, मजबूत बनेगा रिश्ता
By: Team Aapkisaheli | Posted: 14 Aug, 2026
बच्चे की परवरिश जिंदगी की सबसे खूबसूरत, लेकिन जिम्मेदारी भरी यात्राओं में से एक होती है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर समझदार, आत्मनिर्भर और अच्छा इंसान बने। इसके लिए केवल अच्छी पढ़ाई और सुविधाएं देना ही काफी नहीं है। बच्चे को घर का माहौल, माता-पिता का व्यवहार और उनसे मिलने वाला भावनात्मक सहारा भी बहुत प्रभावित करता है। कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीद करने लगते हैं या उनकी हर गलती पर डांट देते हैं। इससे बच्चा अपनी बात कहने से बच सकता है। बेहतर पैरेंटिंग का मतलब हर समय परफेक्ट होना नहीं, बल्कि बच्चे को समझने और जरूरत के अनुसार अपने तरीके में बदलाव करने की कोशिश करना है। प्यार, अनुशासन, भरोसे और संवाद का संतुलन बच्चे के व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बच्चे की बात सुनना सीखेंअच्छी पैरेंटिंग की शुरुआत बच्चे को ध्यान से सुनने से होती है। बच्चा स्कूल की कोई छोटी घटना बता रहा हो या किसी दोस्त से हुई परेशानी साझा कर रहा हो, उसकी बात को तुरंत नजरअंदाज न करें। कई बार बच्चे के लिए छोटी लगने वाली समस्या उसके लिए बहुत बड़ी हो सकती है। इसलिए बीच में टोके बिना उसकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर सवाल पूछकर उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। जब बच्चे को भरोसा होता है कि माता-पिता उसकी बात बिना तुरंत जज किए सुनेंगे, तो वह अपनी परेशानियां छिपाने के बजाय खुलकर साझा करना सीखता है।
हर गलती पर डांटने के बजाय समझाएंबच्चों का गलतियां करना उनके सीखने का हिस्सा है। अगर हर छोटी गलती पर उन्हें डांटा जाएगा, तो उनमें डर पैदा हो सकता है। इसके बजाय उन्हें बताएं कि गलती कहां हुई और अगली बार उसे कैसे सुधारा जा सकता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि अनुशासन जरूरी नहीं है। घर में कुछ स्पष्ट नियम बनाना जरूरी है, लेकिन उनके पीछे की वजह बच्चे को समझाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब बच्चा नियमों का कारण समझता है, तो वह उन्हें केवल डर की वजह से नहीं बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझकर अपनाना सीखता है।
दूसरे बच्चों से तुलना करने से बचेंहर बच्चा अपनी अलग क्षमता और व्यक्तित्व लेकर बड़ा होता है। किसी बच्चे की पढ़ाई अच्छी हो सकती है, तो कोई खेल, कला, संगीत या दूसरी गतिविधियों में बेहतर हो सकता है। इसलिए उसकी तुलना भाई-बहन, दोस्त या पड़ोस के बच्चे से करने से बचें। बार-बार तुलना करने से बच्चे को लग सकता है कि वह पर्याप्त अच्छा नहीं है। इसके बजाय उसकी रुचि और खूबियों को पहचानें। उसकी मेहनत की तारीफ करें और केवल परिणाम पर ध्यान न दें। इससे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ने के साथ नई चीजें सीखने की इच्छा भी बनी रहती है।
बच्चे के सामने अपने व्यवहार का रखें ध्यानबच्चे केवल माता-पिता की बातें सुनकर नहीं, बल्कि उन्हें देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा बड़ों का सम्मान करे, तो खुद भी दूसरों से सम्मानपूर्वक बात करें। आप चाहते हैं कि वह गुस्से पर नियंत्रण रखे, तो घर में विवाद के दौरान खुद भी संयम दिखाएं। इसी तरह झूठ बोलने से मना करने के साथ अपने व्यवहार में ईमानदारी रखना जरूरी है। माता-पिता का रोजमर्रा का व्यवहार बच्चे के लिए एक तरह का उदाहरण बन जाता है। इसलिए अच्छी आदतें सिखाने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें अपने जीवन में अपनाना है।
प्यार के साथ सीमाएं तय करना भी जरूरीबच्चे की हर इच्छा पूरी कर देना प्यार नहीं है। उसे यह समझना भी जरूरी है कि जिंदगी में कुछ नियम और सीमाएं होती हैं। मोबाइल, टीवी, पढ़ाई, खेलने और सोने का समय उम्र के अनुसार तय किया जा सकता है। साथ ही बच्चे को अपनी उम्र के हिसाब से छोटी जिम्मेदारियां भी दें, जैसे अपना सामान व्यवस्थित करना या पढ़ाई की चीजें खुद संभालना। इससे उसमें जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। सबसे जरूरी है कि माता-पिता बच्चे को प्यार और सुरक्षा का एहसास देते रहें। जब अनुशासन के साथ भरोसा और अपनापन भी हो, तो बच्चा अपनी गलतियों से सीखते हुए आत्मनिर्भर और संवेदनशील इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
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