Parenting : पीरियड टैबू को कहें बाय-बाय पहली बार पीरियड्स आने पर डरे नहीं खुलकर मुस्कुराए आपकी बेटी पेरेंट्स अपनाएं ये 5 मॉडर्न अप्रोच
By: Team Aapkisaheli | Posted: 18 Jun, 2026
आज के इस डिजिटल और आधुनिक दौर में भी जब घर में बेटी के पहले पीरियड की बात आती है तो कई परिवारों में अजीब सी खामोशी छा जाती है। आज भी सेनेटरी पैड को अखबार या काले लिफाफे में लपेटकर लाना इस बात का सबूत है कि हम इस बेहद सामान्य जैविक प्रक्रिया को सहजता से स्वीकार नहीं पा रहे हैं।
ग्लोबल चाइल्ड केयर एक्सपर्ट्स और यूनिसेफ की हालिया गाइडलाइंस के मुताबिक पीरियड्स को छुपाने या इसे लड़कियों की गुप्त समस्या बताने के बजाय इसे जीवन के एक खूबसूरत पड़ाव के रूप में सेलिब्रेट किया जाना चाहिए। अगर आप भी एक बेटी के माता-पिता हैं तो पुराने ढर्रे को छोड़कर इन 5 नए और व्यावहारिक तरीकों से अपनी बेटी के इस सफर को आसान बनाएं।
द पीरियड टॉक सही समय पर करें शुरुआत:
अक्सर पेरेंट्स तब बात करते हैं जब पीरियड आ जाता है जो कि गलत है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जब बेटी में प्यूबर्टी किशोरावस्था के शुरुआती लक्षण जैसे कि ब्रेस्ट बड्स स्तनों का विकास दिखना शुरू हो तो समझें कि अगले 1 से 2 साल में उसे पहला पीरियड आ सकता है। यही सही समय है जब आपको उससे इस विषय पर बात शुरू कर देनी चाहिए ताकि अचानक ब्लीडिंग देखकर वह डरे या सहमे नहीं।
डर या पाबंदी नहीं पीरियड पॉज को सेलिब्रेट करें:
पुराने समय में पीरियड्स आते ही बेटियों पर अचार न छूने पूजा में न बैठने या अलग कमरे में रहने जैसी कई पाबंदियां लगा दी जाती थीं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं। मॉडर्न पेरेंटिंग कहती है कि इस दिन को खास बनाएं। बेटी को उसकी पसंदीदा चॉकलेट दें फूल लाएं और उसे समझाएं कि उसका शरीर पूरी तरह स्वस्थ है और वह अब बड़े होने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। इसे अभिषाप नहीं वरदान की तरह पेश करें।
पीरियड किट करें तैयार और स्कूल बैग में रखें बैकअप:
बेटी का पहला पीरियड स्कूल में या घर से बाहर भी आ सकता है। इस डर को दूर करने के लिए उसके साथ मिलकर एक फैंसी पाउच में पीरियड किट तैयार करें। इसमें 2-3 सेनेटरी पैड्स या पीरियड अंडरवियर। एक एक्स्ट्रा अंडरगारमेंट ताकि दाग लगने पर बदला जा सके कुछ टिशू पेपर और एक छोटा सैनिटाइजर इस किट को हमेशा उसके स्कूल बैग में रखें ताकि वह हर स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार रहे।
सिर्फ मां क्यों पीरियड डायलॉग में पिताओं की भी हो भागेदारी:
अक्सर माना जाता है कि पीरियड्स पर सिर्फ मां और बेटी ही बात करेंगी। लेकिन एक संवेदनशील पिता की भूमिका बेटी का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा सकती है। पिताओं को भी इस विषय पर सहज होना होगा ताकि अगर मां घर पर न हो तो बेटी बिना किसी झिझक के अपने पिता से पैड मंगवा सके या अपनी तकलीफ साझा कर सके। यह बदलाव घर से ही शुरू होना चाहिए।
सिर्फ पैड बदलना काफी नहीं सिखाएं क्रैम्प्स मैनेजमेंट और डाइट:
पहले पीरियड के दौरान बच्चियों को पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द कमर दर्द भारीपन या मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ता है। उन्हें बताएं कि यह हॉर्मोनल बदलावों के कारण होता है। ऐसे समय मे उन्हें गर्म पानी की थैली से सिकाई करना सिखाए। उनकी डाइट में आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर चीजें जैसे हरी सब्जियां फल शामिल करें क्योंकि ब्लीडिंग के कारण शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है। उन्हें सिखाएं कि हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलना हाइजीन और इंफेक्शन से बचने के लिए कितना जरूरी है।
पेरेंट्स के लिए एक जरूरी सलाह: शुरुआत के 1 से 2 साल लड़कियों का पीरियड साइकिल मासिक धर्म चक्र काफी अनियमित हो सकता है। कभी महीने में दो बार या कभी 2-3 महीने तक पीरियड न आना शुरुआती सालों में सामान्य है। लेकिन अगर ब्लीडिंग 7 दिनों से ज्यादा हो या दर्द असहनीय हो तो बिना देर किए किसी महिला डॉक्टर से संपर्क करें।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
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