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Parenting : स्क्रीन के आगे बेबस हैं पैरेंट्स, बच्चों के हाथ से बिना रोए-धोए छूटेगा मोबाइल बस अपनाएं ये 5 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स

By: Team Aapkisaheli | Posted: 16 May, 2026

Parenting : स्क्रीन के आगे बेबस हैं पैरेंट्स, बच्चों के हाथ से बिना रोए-धोए छूटेगा मोबाइल बस अपनाएं ये 5 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स
आजकल के दौर में बच्चों का स्मार्टफोन से नाता सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह उनकी डिजिटल लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। लेकिन जब यह जरूरत एक लत में बदल जाती है, तो बच्चों के चिड़चिड़ेपन और उनके मानसिक विकास पर इसका सीधा असर दिखने लगता है। 
अक्सर माता-पिता की यह सबसे बड़ी सिरदर्दी होती है कि जैसे ही बच्चे के हाथ से फोन लो वह रोना-धलाना या जिद करना शुरू कर देता है। अगर आप भी इस डिजिटल टेंट्रम से परेशान हैं तो बिना किसी डांट-फटकार या जोर-जबरदस्ती के इन 5 स्मार्ट तरीकों से बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग को कंट्रोल कर सकते हैं: 
फिजिकल एक्टिविटी को बनाएं मजेदारः 
बच्चों का ध्यान मोबाइल से हटाने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि उनकी एनर्जी को कहीं और चैनलाइज किया जाए। उन्हें केवल घर में बोर होने के लिए न छोड़ें बल्कि आउटडोर गेम्स स्विमिंग कराटे या डांस जैसी एक्टिविटीज का हिस्सा बनाएं। जब वे शारीरिक रूप से थकेंगे और कुछ नया सीखेंगे तो उनका दिमाग खुद-ब-खुद स्क्रीन की दुनिया से बाहर आ जाएगा। 

आपसी सहमति से तय करें नो-स्क्रीन जोनः 

घर में मोबाइल चलाने का एक कड़ा नियम बनाने के बजाय बच्चों को उस नियम का हिस्सा बनाएं। उनसे बात करके दिन का एक या दो निश्चित स्लॉट जैसे 45 मिनट या 1 घंटा तय करें जिसमें वे फोन देख सकते हैं। इसके अलावा खाना खाते समय या सोने से ठीक पहले नो-स्क्रीन रूल को सख्ती से लागू करें और इसमें परिवार के बड़े सदस्य भी उनका साथ दें। 

नए हॉबीज और क्रिएटिविटी को दें बढ़ावाः 

अगर बच्चे के पास खाली वक्त होगा तो उसका हाथ सीधे फोन की तरफ ही जाएगा। इसलिए उन्हें दिलचस्प कॉमिक्स पंचतंत्र की कहानियां या फिर आर्ट एंड क्राफ्ट पेंटिंग और क्ले-मॉडलिंग जैसी चीजों में व्यस्त रखें। जब उन्हें हाथों से कुछ नया क्रिएट करने में मजा आने लगेगा तो मोबाइल की लत धीरे-धीरे कम होने लगेगी। 

क्वालिटी टाइम से भरेगा इमोशनल गैपः 
कई बार बच्चे अकेलेपन या बोरियत की वजह से भी फोन का सहारा लेते हैं। कोशिश करें कि वीकेंड्स पर उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलें प्रकृति के बीच वॉक पर जाएं या साथ मिलकर कोई आसान सी डिश या बेकिंग ट्राई करें। जब बच्चों को माता-पिता से पूरा अटेंशन और क्वालिटी टाइम मिलता है तो उनका स्क्रीन पर निर्भर रहना काफी हद तक कम हो जाता है। 

सडन स्नैचिंग के बजाय दें एडवांस वार्निंगः 

अचानक से बच्चे के हाथ से फोन छीन लेना उनके गुस्से और जिद को दोगुना बढ़ा देता है। इसकी जगह टाइम वार्निंग का फॉर्मूला अपनाएं। फोन देने से पहले ही कह दें कि आपके पास सिर्फ 20 मिनट हैं और समय खत्म होने से 5 मिनट पहले उन्हें याद दिलाएं कि अब फोन रखने का वक्त हो रहा है। इस एडवांस वार्निंग से बच्चे का दिमाग खुद को तैयार कर लेता है और वह बिना रोए फोन वापस कर देता है। 
-हेमलता शर्मा, जयपुर

#गोपी बहू कितना ग्लैमर अवतार देखकर चौंक जाएंगे आप!


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