छोटे बच्चों को बिना डांटे घर पर कैसे पढ़ाएं ये आसान तरीके बदल देंगे बच्चे का व्यवहार
By: Team Aapkisaheli | Posted: 15 May, 2026
आजकल ज़्यादातर माता-पिता की यह बड़ी शिकायत होती है कि बच्चा घर पर पढ़ाई के नाम से ही भागने लगता है। किताबों को देखते ही उसे नींद आने लगती है या फिर वह कोई न कोई बहाना बनाकर उठ जाता है। ऐसे में माता-पिता अक्सर गुस्सा करने लगते हैं या फिर महंगे ट्यूशन का सहारा लेते हैं। लेकिन असल में छोटे बच्चों को सख्ती से नहीं बल्कि सही तकनीक और प्यार से सिखाने की ज़रूरत होती है।
अगर आप भी अपने बच्चे की इस आदत से परेशान हैं तो पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए ये आसान तरीके आपके बहुत काम आ सकते हैं। इनकी मदद से बच्चा बिना किसी दबाव के खुद ही पढ़ाई में दिलचस्पी लेने लगेगा।
पढ़ाई के लिए तय करें एक सही कोना और समयबच्चों के लिए एक रूटीन होना बेहद ज़रूरी है। उनके पढ़ने का एक निश्चित समय तय करें और घर में एक ऐसा कोना बनाएं जहाँ शांति हो। जब बच्चा रोज एक ही समय और एक ही जगह पर बैठेगा तो उसका दिमाग पढ़ाई के लिए मानसिक रूप से तैयार होने लगेगा। ध्यान रखें कि उस जगह के आसपास टीवी मोबाइल या शोर-शराबा न हो ताकि बच्चे का ध्यान पूरी तरह केंद्रित रह सके।
लगातार पढ़ाने के बजाय दें छोटे-छोटे ब्रेकछोटे बच्चों की एकाग्रता का समय यानी अटेंशन स्पैन बहुत कम होता है। वे एक जगह पर लंबे समय तक नहीं बैठ सकते। इसलिए उन्हें घंटों लगातार पढ़ाने की गलती बिल्कुल न करें। इसका सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप उन्हें 20 मिनट पूरी तरह मन लगाकर पढ़ाएं और फिर 5 मिनट का एक छोटा सा ब्रेक दें। इस ब्रेक में उन्हें पानी पीने थोड़ा टहलने या कोई हल्की फिजिकल एक्टिविटी करने दें। इससे उनका दिमाग तरोताज़ा हो जाएगा और वे अगली बार दोगुनी ऊर्जा के साथ बैठेंगे।
रटाने के बजाय खेल और कहानियों का लें सहाराहर बच्चा अनोखा होता है और उसके सीखने की गति भी अलग होती है। अक्षरों और संख्याओं को केवल किताबों से रटाने के बजाय उन्हें असल जिंदगी की चीजों से जोड़ें। जैसे गणित सिखाने के लिए उनके खिलौनों या रसोई के बर्तनों को गिनने के लिए कहें। विज्ञान और भाषा सिखाने के लिए रंग-बिरंगे चित्रों और मज़ेदार कहानियों का सहारा लें। जब पढ़ाई खेल बन जाती है तो बच्चा बिना किसी डर के नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहता है।
तारीफ और छोटे इनामों से बढ़ाएं हौसलाजब बच्चा कोई छोटा सा काम भी सही करे या कोई नया शब्द सीखे तो उसकी तारीफ ज़रूर करें। आप उनके लिए एक स्टार चार्ट बना सकते हैं जहाँ हर अच्छे काम या पढ़ाई के सेशन के बाद उन्हें एक स्टार मिले। यह सराहना बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है। उन्हें महसूस होता है कि उनकी मेहनत की कद्र की जा रही है जिससे वे अगली बार और बेहतर करने की कोशिश करते हैं।
बच्चों को जीनियस बनाने के लिए महंगे स्कूलों या ट्यूशनों से ज़्यादा आपके धैर्य और सही दृष्टिकोण की ज़रूरत होती है। गुस्से की जगह प्यार और समझदारी का माहौल देकर आप उनके भीतर सीखने की एक ऐसी ललक जगा सकते हैं जो जीवनभर उनके काम आएगी।
हेमलता शर्मा जयपुर
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