Parenting: पढ़ाई के प्रति बच्चों की अरुचि को कैसे बदलें, विशेषज्ञों ने बताए ये छह अचूक मंत्र
By: Team Aapkisaheli | Posted: 08 May, 2026
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और डिजिटल गैजेट्स के बढ़ते प्रभाव के बीच माता पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को पढ़ाई की मेज तक लाना है। अक्सर पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि किताब खुलते ही बच्चे बोर होने लगते हैं या ध्यान भटकाने के बहाने ढूंढते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों पर दबाव बनाने के बजाय स्मार्ट पेरेंटिंग के जरिए उनके पढ़ने के नजरिए को बदला जा सकता है। यहाँ कुछ ऐसे व्यावहारिक बदलाव दिए गए हैं जो आपके बच्चे को पढ़ाई से प्यार करने पर मजबूर कर देंगे।
स्टडी कॉर्नर और निश्चित दिनचर्या का जादू: बच्चों का दिमाग स्थिरता पसंद करता है। अगर पढ़ाई का समय और स्थान रोज बदलेगा तो उनका मन कभी एकाग्र नहीं हो पाएगा। घर का एक कोना नो नॉइज़ ज़ोन बनाएं जहाँ टीवी और शोर न हो। एक तय रूटीन बनाने से बच्चे का मस्तिष्क उस समय के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लेता है।
छोटे अंतराल की शक्ति: घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना बड़े बड़ों के लिए मुश्किल है तो बच्चे कैसे कर सकते हैं। हर तीस से चालीस मिनट की पढ़ाई के बाद दस मिनट का रिफ्रेशमेंट ब्रेक अनिवार्य करें। इसमें बच्चा स्ट्रेचिंग करे या पानी पिए ताकि दिमाग की थकान कम हो और याद करने की क्षमता बनी रहे।
रटना छोड़ें विजुअल लर्निंग अपनाएं: किताबों के शब्दों को बोझ न बनने दें। मुश्किल विषयों को समझाने के लिए रंगीन पेन डायग्राम फ्लोचार्ट या वास्तविक जीवन के उदाहरणों का उपयोग करें। लिखकर याद करने की आदत डालने से न केवल हैंडराइटिंग सुधरती है बल्कि विषय दिमाग में गहराई तक बैठ जाता है।
डिजिटल डिटॉक्स गैजेट्स को रखें दूर: पढ़ाई के दौरान मोबाइल या टैबलेट का पास होना ध्यान भटकने का सबसे बड़ा कारण है। पढ़ाई के समय को पूरी तरह गैजेट फ्री रखें। बच्चे को यह स्पष्ट करें कि स्क्रीन टाइम उसे केवल टास्क पूरा करने के बाद ही रिवॉर्ड के तौर पर मिलेगा।
प्रोत्साहन की ताकत कमियों के बजाय खूबियों पर ध्यान: गलती पर टोकने के बजाय बच्चे की छोटी सी उपलब्धि पर उसकी पीठ थपथपाएं। आज तुमने बहुत अच्छा लिखा जैसे छोटे वाक्य बच्चों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देते हैं। सकारात्मक प्रोत्साहन उन्हें कठिन विषयों से लड़ने की हिम्मत देता है।
संवाद बढ़ाएं दबाव घटाएं: पढ़ाई को सजा के तौर पर पेश करना बंद करें। बच्चे से बात करें कि उसे कौन सा विषय कठिन लग रहा है और क्यों। जब आप एक शिक्षक के बजाय एक मार्गदर्शक बनकर उनसे जुड़ते हैं तो वे अपनी समस्याओं को खुलकर बताते हैं और पढ़ाई उनके लिए आनंददायक बन जाती है। याद रखें हर बच्चा अलग होता है। उसकी सीखने की गति की तुलना दूसरों से न करें बल्कि उसके आज के प्रयास को उसके बीते हुए कल से बेहतर बनाने की कोशिश करें।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
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