धार्मिक विरासत से सामाजिक विद्रोह तक, श्री कालाराम मंदिर की ऐतिहासिक कहानी
By: Team Aapkisaheli | Posted: 23 Feb, 2026
नासिक। भारत की पवित्र भूमि पर हजारों प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, अनूठी परंपराओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में से एक महाराष्ट्र के नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित श्री कालाराम मंदिर है, जो प्रभु श्री राम को समर्पित है।
श्री कालाराम एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो काले पत्थरों से बना है। मंदिर की मूर्तियां अनूठे काले पत्थरों से बनी हैं। इसलिए इसे कालाराम कहा जाता है। मंदिर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की काली प्रतिमाएं विराजमान हैं, जो गोदावरी नदी से प्राप्त हुई थीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का यह स्थान भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि यह पंचवटी क्षेत्र में स्थित है, जहां भगवान राम ने पत्नी सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अपने वनवास का समय बिताया था।
श्री कालाराम मंदिर 1782 ईस्वी का बताया जाता है, जो 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर के चारों दिशाओं में 4 दरवाजे हैं और महाद्वार से प्रवेश करने पर भव्य सभामंडप नजर आते हैं, जिसकी ऊंचाई 12 फीट है।
मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां हैं, जो राम के 14 वर्ष के वनवास काल को दर्शाती हैं।
मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ हैं, जो 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां हनुमान जी की भी एक काली मूर्ति है, जो प्रभु श्री राम के चरणों की ओर देखती नजर आती है।
मंदिर की खासियत है कि यहां रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा बहुत ही धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं। इस समय देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन और उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आते हैं।
श्री कालाराम मंदिर सिर्फ एक प्राचीन धार्मिक विरासत ही नहीं, इसका इतिहास और सामाजिक विद्रोह से भी जुड़ा है। यह 1930 में डॉ. भीम राव अंबेडकर के मंदिर प्रवेश आंदोलन का केंद्र रहा है। यहीं से डॉ. बीआर अंबेडकर ने दलितों के मंदिर में प्रवेश के लिए एक प्रमुख आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसके बाद दलितों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिली।
-आईएएनएस
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