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Career : भारत में 37 प्रतिशत शुरुआती नौकरियां एआई पर निर्भर अब सुपर-स्किल्स का जमाना

By: Team Aapkisaheli | Posted: 20 Jun, 2026

Career : भारत में 37 प्रतिशत शुरुआती नौकरियां एआई पर निर्भर अब सुपर-स्किल्स का जमाना
अगर आप भी रात दिन जागकर सिर्फ कोडिंग सीख रहे हैं या किताबी ज्ञान रटकर लाखों के पैकेज का सपना देख रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए। भारत के जॉब मार्केट का मौसम रातोंरात बदल चुका है। दिग्गज आईटी कंपनी कॉग्निजेंट और पियर्सन की ताजा रिपोर्ट द एआई वर्कफोर्स पल्स ने नौकरी की तलाश करने वालों की नींद उड़ा दी है। ​
इस नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं की लगभग सैंतीस प्रतिशत नौकरियों पर एआई ने अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत ज्यादा रफ्तार से इंसानी काम को अपने हाथ में ले रहा है।

​कोडिंग की चमक हुई फीकी और इन नई डिग्रियों की बढ़ी धमक:

​एक दौर था जब कंप्यूटर साइंस या इंजीनियरिंग की डिग्री हाथ में होते ही कंपनियों की लाइन लग जाती थी पर अब ऐसा नहीं है। चूंकि बुनियादी कोडिंग का काम अब एआई खुद कर देता है इसलिए कंपनियों की पसंद बिल्कुल बदल गई है। इस समय बाजार में दो अलग तरह के कोर्सेज की भारी डिमांड है। ​

पहली पसंदीदा पढ़ाई लिबरल आर्ट्स की हैः 

यह कोर्स युवाओं को मशीनी सोच से बाहर निकालकर लीक से हटकर सोचना सिखाता है और मुश्किल हालातों में सही फैसले लेने के काबिल बनाता है। ​

दूसरी बड़ी पसंद इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सेज हैंः 

इसमें छात्र किसी एक विषय में नहीं बंधते बल्कि वे टेक्नोलॉजी के साथ बिजनेस मैनेजमेंट या फिर आर्ट्स के साथ डेटा साइंस जैसे अनोखे कॉम्बिनेशन चुनते हैं जिससे वे मल्टीटास्किंग बन जाते हैं।

​रटने वाले हुए बाहर अब सिर्फ इन खूबियों वालों को मिलेगी नौकरी:

​कंपनियों ने अब साफ कर दिया है कि उन्हें दफ्तरों में इंसानी रोबोट या रट्टू तोते नहीं चाहिए। एआई के इस दौर में कंपनियों को ऐसे शातिर और समझदार दिमागों की तलाश है जो इन खास खूबियों से लैस हों।

​पहली खूबी है एआई सुपरविजन की कलाः 

आने वाले समय में नौकरी उसकी नहीं होगी जो एआई से डरेगा बल्कि उसकी होगी जो एआई को उंगलियों पर नचाएगा यानी उसे सही निर्देश देकर काम कराएगा और उसकी गलतियां पकड़ेगा।

​दूसरी खूबी है आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंगः 

मशीनें हमेशा पुराने डेटा पर काम करती हैं पर जब कोई नई और अजीब मुसीबत आती है तो वहां सिर्फ इंसान का दिमाग और उसकी रचनात्मकता ही रास्ता निकाल सकती है।

​तीसरी खूबी है दमदार सॉफ्ट स्किल्सः 

बेहतरीन संवाद शैली साथियों को प्रेरित करने का हुनर और सामने वाले की भावनाओं को समझने की क्षमता जैसी चीजें कोई भी सॉफ्टवेयर कभी नहीं सीख सकता। ​

समय रहते संभलने की आखिरी चेतावनी:

​यह ताजा आंकड़े उन छात्रों और कॉलेजों के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं जो आज भी बरसों पुराने सिलेबस को ढो रहे हैं। अगर अब भी पढ़ाई के तरीकों को नहीं बदला गया तो आने वाले दिनों में डिग्रियां सिर्फ दीवारों पर सजाने के काम आएंगी। आने वाला कल सिर्फ और सिर्फ उनका है जो तकनीक को अपना हथियार बनाकर अपनी इंसानी काबिलियत का लोहा मनवाएंगे। 

-हेमलता शर्मा, जयपुर

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