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स्लीप एपनिया से पीडि़त महिलाओं में कैंसर होने का खतरा ज्यादा : शोध

By: Team Aapkisaheli | Posted: 18 Aug, 2019

स्लीप एपनिया से पीडि़त महिलाओं में कैंसर होने का खतरा ज्यादा : शोध
लंदन। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीडि़त महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा कैंसर होने का खतरा ज्यादा है। शोधकर्ताओं ने इस बात की चेतावनी दी है।

द यूरोपियन रेस्पिरेटरी पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन प्राप्त आंकड़ों के विश£ेषण पर आधारित है जो ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीडि़त कुल मिलाकर 20,000 वयस्क मरीजों पर यूरोपियन डेटाबेस ईएसएडीए में संग्रह किया गया है। इनमें से दो प्रतिशत मरीजों में कैंसर का पता लगाया गया।

स्वीडन में गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के प्राध्यापक लुडगर ग्रॉट ने कहा, ‘‘यह मान लेना उचित है कि स्लीप एपनिया कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है या दोनों ही स्थितियों के जोखिम कारक हैं जैसे कि ओवरवेट। दूसरी ओर इसकी संभावना कम है कि कैंसर से स्लीप एपनिया हो सकती है।’’

शोधकर्ताओं के मुताबिक, बढ़ती उम्र कैंसर के बढ़ते जोखिम के साथ संबंधित है, लेकिन उम्र, लिंग, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), धूम्रपान और मादक द्रव्यों के उपयोग के आंकड़ों को समायोजित करने से पता चलता है कि रात में निरंतर हाइपोक्सिया से कैंसर होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

यह संबंध पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक देखा गया।

ग्रॉट ने कहा, ‘‘हमारा परिणाम कैंसर के जोखिम की ओर इशारा करता है जो स्लीप एपनिया से पीडि़त महिलाओं में दो से तीन गुना ज्यादा है।’’

शोध में कहा गया कि स्लीप एपनिया से लोग भली-भांति परिचित हैं, इससे खर्राटे, दिन में थकान और दिल की बीमारियों के होने का खतरा रहता है और यह सामान्यत: पुरुषों में अधिक होता है।

(आईएएनएस)

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मुंबई । बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का कहना है कि वह खुद से प्यार 
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 जो उन्हें खुश करती हैं। भूमि ने कहा,
मुंबई । बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का कहना है कि वह खुद से प्यार करती हैं और महामारी के दौरान उन्होंने उन चीजों पर ध्यान केंद्रित किया है जो उन्हें खुश करती हैं। भूमि ने कहा, "एक चीज जो मैंने अपने बारे में सीखी है, वह यह कि मुझे अलग, भीड़ से दूर रहना पसंद है। मैंने खुद से प्यार किया है। मैंने बहुत से लोगों को शिकायत करते देखा कि वे घर पर बोर हो चुके हैं या वे बाहर नहीं जा सकते। मैं भी एक एक्सट्रोवर्ट हूं, मैं एक बहुत ही सामाजिक व्यक्ति हूं, लेकिन इस क्वारंटाइन ने मुझे यह एहसास दिलाया है कि मैं लोगों से मिलने की बजाय अलगाव पसंद करती हूं, क्योंकि मैं वास्तव में लोगों के संपर्क में नहीं हूं।"उन्होंने आगे कहा, "मैं किताबे पढ़ने पर जोर दे रही हूं, ज्यादा टेलीविजन नहीं देखा, लेकिन अब शो देखना शुरू कर दिया है। मैंने अपनी मां के साथ बहुत समय बिताया है, और ईमानदारी से कहूं तो ऐसे दिन भी थे जब मैंने कुछ नहीं किया।"भूमी का कहना है कि आत्म-प्रेम खुशी की चाबी है और उसने इस लॉकडाउन में खुद को प्राथमिकता दी है।उन्होंने आगे कहा, "मैंने जीवन में जो कुछ भी महत्वपूर्ण है, उसे प्राथमिकता दी है। मैंने खुद को फिर से शिक्षित किया है। लेकिन सबसे बड़ी सीख यह रही है कि मुझे अकेले रहना बहुत पसंद है।" (आईएएनएस)

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