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मुरैना में अनोखा प्रयोग, डोरबेल खराब इसलिए मोदी-मोदी चिल्लाकर दरवाजा खुलवाएं

By: Team Aapkisaheli | Posted: 11 Apr, 2019

मुरैना में अनोखा प्रयोग, डोरबेल खराब इसलिए मोदी-मोदी चिल्लाकर दरवाजा खुलवाएं
मुरैना। चुनाव के दौरान अनोखे और रोचक नजारे देखने को मिलते हैं। इसी तरह का नजारा इन दिनों मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में देखने को मिल रहा है। यहां की एक बस्ती में लोगों ने घर की डोरबेल खराब होने पर मोदी-मोदी चिल्लाकर दरवाजा खुलवाने के पर्चे लगा रखे हैं ।

मामला रामनगर इलाके का है, यहां के कई घरों के बाहर पर्चे लगे हैं। इन पर्चों पर लिखा हुआ है, ‘डोरबेल खराब है, कृपया दरवाजा खुलवाने के लिए मोदी-मोदी चिल्लाएं।’ जिन घरों के बाहर यह पर्चियां लगी हैं, उन्हीं मे से एक आवास के मालिक गिर्राज शर्मा का कहना है कि उनके घर की डोरबेल खराब हो गई, तो उनके मन में कुछ नया करने का विचार आया, लिहाजा उन्होंने डोरबेल के नीचे इस तरह की पर्ची लगाई है।

रामनगर इलाके में एक-दूसरे को देखकर कई लागों ने अपने घरों के बाहर इसी तरह की पर्चियां लगा रखी हैं। अब आलम यह है कि यहां के कई घरों के बाहर डोरबेल के नीचे इस तरह की पर्चियां नजर आ रही हैं। मकानों के बाहर लगी ये पर्चियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जो भी इन घरों के सामने से गुजरता है उसका ध्यान बरबस इन पर्चियों की तरफ  चला जाता है।
(आईएएनएस)

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मुंबई । बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का कहना है कि वह खुद से प्यार 
करती हैं और महामारी के दौरान उन्होंने उन चीजों पर ध्यान केंद्रित किया है
 जो उन्हें खुश करती हैं। भूमि ने कहा,
मुंबई । बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का कहना है कि वह खुद से प्यार करती हैं और महामारी के दौरान उन्होंने उन चीजों पर ध्यान केंद्रित किया है जो उन्हें खुश करती हैं। भूमि ने कहा, "एक चीज जो मैंने अपने बारे में सीखी है, वह यह कि मुझे अलग, भीड़ से दूर रहना पसंद है। मैंने खुद से प्यार किया है। मैंने बहुत से लोगों को शिकायत करते देखा कि वे घर पर बोर हो चुके हैं या वे बाहर नहीं जा सकते। मैं भी एक एक्सट्रोवर्ट हूं, मैं एक बहुत ही सामाजिक व्यक्ति हूं, लेकिन इस क्वारंटाइन ने मुझे यह एहसास दिलाया है कि मैं लोगों से मिलने की बजाय अलगाव पसंद करती हूं, क्योंकि मैं वास्तव में लोगों के संपर्क में नहीं हूं।"उन्होंने आगे कहा, "मैं किताबे पढ़ने पर जोर दे रही हूं, ज्यादा टेलीविजन नहीं देखा, लेकिन अब शो देखना शुरू कर दिया है। मैंने अपनी मां के साथ बहुत समय बिताया है, और ईमानदारी से कहूं तो ऐसे दिन भी थे जब मैंने कुछ नहीं किया।"भूमी का कहना है कि आत्म-प्रेम खुशी की चाबी है और उसने इस लॉकडाउन में खुद को प्राथमिकता दी है।उन्होंने आगे कहा, "मैंने जीवन में जो कुछ भी महत्वपूर्ण है, उसे प्राथमिकता दी है। मैंने खुद को फिर से शिक्षित किया है। लेकिन सबसे बड़ी सीख यह रही है कि मुझे अकेले रहना बहुत पसंद है।" (आईएएनएस)

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