होलिका दहन के लिए घर पर ही बना लीजिए उपला, ये है सबसे आसान तरीका
By: Team Aapkisaheli | Posted: 24 Feb, 2026
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है और इस दिन से होली के त्योहार की शुरुआत होती है। इस शुभ अवसर पर परंपरागत तरीके से उपले जलाकर होलिका दहन करना बेहद शुभ माना जाता है। बाजार से उपले खरीदना तो आसान होता है, लेकिन घर पर बने उपलों का धार्मिक महत्व और शुद्धता अलग ही होती है। साथ ही, घर पर उपले बनाना न सिर्फ आसान है बल्कि यह एक पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीका भी है। अगर आप भी होलिका दहन के लिए शुद्ध और देसी उपले बनाना चाहती हैं, तो यह तरीका आपके लिए बेहद आसान और उपयोगी साबित होगा। थोड़ी सी मेहनत से आप घर बैठे उपले तैयार कर सकती हैं।
उपला बनाने के लिए जरूरी सामग्री की सही तैयारीघर पर उपले बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज है गोबर। गाय का ताजा गोबर सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह शुद्ध और जल्दी सूखने वाला होता है। गोबर को किसी साफ जगह पर इकट्ठा करें और उसमें कोई भी गंदगी या कंकड़ न हों, इसका ध्यान रखें। अगर चाहें तो गोबर में थोड़ा सा सूखा भूसा या पुआल भी मिला सकती हैं, इससे उपले मजबूत बनते हैं और अच्छे से जलते हैं। सामग्री की सही तैयारी उपलों की गुणवत्ता तय करती है।
उपले बनाने का पारंपरिक और आसान तरीकाअब गोबर को हाथों से अच्छी तरह गूंथ लें, ताकि वह एकसार हो जाए। इसके बाद हथेलियों की मदद से गोल या चपटे आकार के उपले बनाएं। आप चाहें तो छोटे या मध्यम आकार के उपले बना सकती हैं, ताकि उन्हें सुखाने और जलाने में आसानी हो। उपले बनाते समय हाथों में थोड़ा पानी लगा लें, इससे गोबर हाथों में चिपकेगा नहीं और उपले अच्छे आकार में बनेंगे।
धूप में सुखाने का सही तरीकाउपले बनाने के बाद उन्हें साफ जमीन, प्लास्टिक शीट या लकड़ी के तख्ते पर धूप में रख दें। तेज धूप में उपले 2–3 दिनों में अच्छी तरह सूख जाते हैं। ध्यान रखें कि उपले पलट-पलट कर सुखाए जाएं, ताकि दोनों तरफ से पूरी तरह सूख जाएं। अच्छी तरह सूखे उपले हल्के और सख्त हो जाते हैं, जिससे होलिका दहन के समय वे आसानी से जलते हैं और ज्यादा धुआं भी नहीं करते।
होलिका दहन में उपले इस्तेमाल करने का महत्वहोलिका दहन में उपले जलाना शुभ और पवित्र माना जाता है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मान्यता है कि उपलों की अग्नि से रोगाणु नष्ट होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि आज भी कई घरों में परंपरागत तरीके से उपले बनाकर होलिका दहन किया जाता है।
पर्यावरण के लिए भी है बेहतर विकल्पघर पर बने उपले पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते। इनमें किसी तरह का केमिकल या प्रदूषण नहीं होता। इसके अलावा, यह तरीका हमारी पुरानी परंपराओं को भी जीवित रखता है और बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का अच्छा माध्यम बनता है।
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