जीवनसाथी के चुनाव में बदल रही GenZ की सोच, क्या परिवार और प्यार के बीच बैठ पाएगा सही तालमेल
By: Team Aapkisaheli | Posted: 04 Nov, 2026
शादी के फैसले में अपनी पसंद और परिवार की राय के बीच सही संतुलन बनाना ही खुशहाल रिश्ते की चाबी है। भारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों का आपसी मेल नहीं है बल्कि यह दो परिवारों के जुड़ने का एक बेहद पवित्र माध्यम माना जाता है। हमारे समाज में हमेशा से ही जीवनसाथी चुनने में माता-पिता और बुजुर्गों का अनुभव सबसे ऊपर रहा है। हालांकि बदलते समय के साथ आज की युवा पीढ़ी यानी GenZ की सोच में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आधुनिक दौर के युवा शादी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में अपनी पसंद और विचारों को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
शादी और रिश्तों के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार पहले के समय में माता-पिता जीवनसाथी की तलाश करते समय परिवार का बैकग्राउंड सामाजिक प्रतिष्ठा शिक्षा और आर्थिक स्थिति को ही सबसे मुख्य आधार मानते थे। आज भी ये सभी बातें अपनी जगह बहुत जरूरी हैं, लेकिन आधुनिक युवाओं की सोच थोड़ा आगे बढ़ चुकी है। आजकल के लड़के और लड़कियां साथी के साथ वैचारिक समानता लाइफस्टाइल भविष्य के लक्ष्य और भावनात्मक जुड़ाव को बहुत अधिक महत्व देते हैं।
कई बार यह माना जाने लगता है कि अपनी पसंद का साथी चुनने की चाहत में परिवार की भूमिका कम हो जाती है जबकि असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आज भी परिवार का मार्गदर्शन बहुत मायने रखता है। माता-पिता का लंबा अनुभव बच्चों को सही दिशा दिखाने में मदद करता है। अंतर केवल इतना आया है कि अब फैसले थोपे नहीं जाते बल्कि सलाह के रूप में साझा किए जाते हैं। यही वजह है कि मैरिज प्लेटफॉर्म भी युवाओं को उनकी पसंद का मौका देने के साथ-साथ पारिवारिक उम्मीदों का पूरा ध्यान रख रहे हैं।
चाहे शादी अरेंज हो या लव किसी भी रिश्ते की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि शुरुआत कैसे हुई थी। रिश्ते की असल मजबूती इस बात में है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे के सपनों का कितना सम्मान करते हैं। जब अपनी पसंद के साथ अपनों का आशीर्वाद मिल जाता हैतब शादी का रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत तथा सुखद बन जाता है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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