वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में रंगों का चुनाव और सही दिशाओं का प्रभाव
By: Team Aapkisaheli | Posted: 06 Aug, 2026
वास्तु शास्त्र में रसोईघर को सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है क्योंकि यहाँ बनने वाला भोजन पूरे परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली को प्रभावित करता है रसोई के लिए सही रंगों का चयन केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ाता बल्कि घर के वातावरण को भी संतुलित रखता हैदिशा के अनुसार रसोई में रंगों का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि का स्थान माना जाता है इसलिए इस दिशा में रसोई होने पर केसरिया नारंगी पीला या लाल रंग लगाना सबसे शुभ रहता है यह रंग कार्य क्षमता और ऊर्जा में वृद्धि करते हैं उत्तर पश्चिम दिशा में बनी रसोई के लिए सफेद हल्का धूसर या बेज रंग शांति और ताजगी प्रदान करता है पूर्वमुखी रसोई में हल्का हरा और नारंगी रंग आपसी संबंधों को मजबूत बनाता है जबकि उत्तर दिशा की रसोई में हल्का नीला या हरा रंग आर्थिक प्रगति में सहायक माना जाता हैरसोई के अलग अलग भागों में भी रंगों का संतुलन होना चाहिए काउंटरटॉप या चबूतरे के लिए बेज हल्का भूरा या प्राकृतिक ग्रेनाइट पत्थर सबसे उपयुक्त रहता है अलमारियों के लिए लकड़ी के शेड्स या हल्के रंगों का प्रयोग किया जा सकता है फर्श के लिए क्रीम या बेज रंग शांतिदायक माहौल बनाते हैंकुछ रंगों के अत्यधिक प्रयोग से रसोई में बचना चाहिए काला गहरा नीला बैंगनी और गहरा भूरा रंग रसोई को अंधकारमय और घुटन भरा बना सकते हैं जिससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती हैयदि रसोई का मुख्य रंग बदलना संभव न हो तो छोटे बदलाव करके भी वास्तु संतुलन बनाया जा सकता है इसके लिए सही रंगों के बर्तन जार खिड़की के पर्दे गर्म रोशनी वाली लाइट्स और छोटे हरे पौधे रसोई में रखे जा सकते हैं केसरिया और क्रीम अथवा सफेद और हल्का हरा रंग मिलाकर लगाना भी एक आधुनिक और वास्तु अनुकूल विकल्प हैरसोई को हमेशा स्वच्छ और हवादार बनाए रखना ही वास्तु का सबसे मुख्य नियम है सही रंगों का ध्यान रखकर रसोई को समृद्ध और सुखद स्थान बनाया जा सकता है
हेमलता शर्मा जयपुर
#परिणीती का मस्त Style देखकर आप भी कहेंगे हाय!