रिलेशनशिप में सुरक्षा या असुरक्षा जानिए रिश्ता जुड़ते ही पार्टनर के पजेसिव होने के पीछे का मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक कारण
By: Team Aapkisaheli | Posted: 12 Aug, 2026
किसी नए रिश्ते की शुरुआत के साथ ही पार्टनर के व्यवहार में बदलाव आना एक आम बात है। अक्सर देखा गया है कि कपल्स में एक-दूसरे को लेकर पजेसिवनेस यानी स्वामित्व या अति-सुरक्षात्मकता बढ़ने लगती है। यद्यपि समाज में यह धारणा है कि महिलाएँ जल्दी पजेसिव होती हैं लेकिन मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह भावना जेंडर से परे है लड़के और लड़कियां दोनों ही अपने पार्टनर को लेकर संवेदनशील हो जाते हैं।आइए जानते हैं कि रिश्ते की शुरुआत में ही किसी व्यक्ति का पजेसिव होना किस वैज्ञानिक और भावनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है।
ब्रेन केमिस्ट्री और ऑक्सीटोसिन का असर रिश्ते में जुड़ाव महसूस होते ही मानव मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है, जिसे लव हार्मोन या बॉन्डिंग हार्मोन भी कहा जाता है। यह हार्मोन व्यक्ति के भीतर सुरक्षा भरोसे और आत्मीयता की भावना को जन्म देता है। जब शरीर में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ता है तो मस्तिष्क उस नए साथी को जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा मानने लगता है। इस वजह से व्यक्ति अपने पार्टनर को खोने के डर से जूझने लगता है जो व्यवहार में पजेसिवनेस के रूप में बाहर आता है।
इमोशनल इन्वेस्टमेंट और पुराना दर्द जब कोई इंसान किसी रिश्ते में अपना समय, ध्यान और भावनाएँ निवेश करता है तो उसमें स्वाभाविक रूप से प्रोटेक्शन यानी सुरक्षा की भावना पैदा होती है। इसके अलावा अतीत के अनुभव यदि किसी व्यक्ति ने बीते समय में धोखा या भावनात्मक चोट सही है तो वह नए रिश्ते में अधिक सतर्क और शक्की हो सकता है। सामाजिक परिवेश: व्यक्ति की परवरिश और उसके आसपास के माहौल का भी उसके व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
पजेसिवनेस: प्यार या खतरा
थोड़ी-बहुत पजेसिवनेस रिश्ते में एक-दूसरे के प्रति परवाह और प्यार को दर्शाती है। लेकिन जब यह भावना पार्टनर की व्यक्तिगत आज़ादी को प्रभावित करने लगे उनके ऊपर बेवजह का शक पैदा करे या उनके हर कदम पर नज़र रखने की वजह बन जाए तो यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का रूप ले लेती है।
रिश्ते में जुड़ाव होना प्राकृतिक है लेकिन पजेसिवनेस और स्पेस के बीच संतुलन बनाए रखना ही एक स्वस्थ रिश्ते की पहचान है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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