Parenting Tips: बच्चे को संस्कारी ही नहीं, समझदार भी बनाना है तो पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान
By: Team Aapkisaheli | Posted: 11 Aug, 2026
बच्चों की परवरिश सिर्फ उनकी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं होती। असली पैरेंटिंग तब शुरू होती है, जब माता-पिता बच्चे के व्यवहार, भावनाओं और सोच को समझने की कोशिश करते हैं। बच्चा घर में जैसा माहौल देखता है, जिस तरह की बातें सुनता है और माता-पिता को दूसरों के साथ व्यवहार करते हुए देखता है, उसका असर धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व पर पड़ता है। इसलिए बच्चों को हर बात पर डांटने या रोकने के बजाय उन्हें समझाना और सही दिशा दिखाना ज्यादा जरूरी है। आज के समय में जब बच्चों के आसपास कई तरह के प्रभाव मौजूद हैं, माता-पिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्यार, अनुशासन, संवाद और भरोसे के बीच सही संतुलन बनाकर बच्चे को आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनाया जा सकता है।
बच्चे को सिर्फ आदेश नहीं, अपनी बात कहने का मौका दें
कई घरों में बच्चों को हर बात पर निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन उनकी बात सुनने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता। अच्छी पैरेंटिंग का पहला कदम यही है कि बच्चे को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। वह किसी बात से परेशान है, किसी चीज से डर रहा है या स्कूल में कोई समस्या हुई है, तो उसकी बात बीच में काटने के बजाय ध्यान से सुनें। हर समस्या का तुरंत समाधान देने की कोशिश भी जरूरी नहीं है। कई बार बच्चे को केवल यह महसूस करना होता है कि उसके माता-पिता उसके साथ हैं। जब बच्चे को घर में खुलकर बोलने की आजादी मिलती है, तो वह अपनी परेशानियां छिपाने के बजाय माता-पिता से साझा करता है।
हर गलती पर डांटने के बजाय समझाएं
बच्चों से गलतियां होना उनकी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर हर गलती पर उन्हें डांटा जाएगा, तो वे अगली बार सच बताने से भी डर सकते हैं। इसके बजाय पहले समझें कि गलती क्यों हुई और फिर बच्चे को बताएं कि उसे कैसे सुधारा जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि अनुशासन खत्म कर दिया जाए। घर के कुछ नियम जरूर बनाएं, लेकिन उनके पीछे की वजह भी बच्चे को समझाएं। उदाहरण के लिए मोबाइल इस्तेमाल का समय तय करते हैं, तो सिर्फ यह न कहें कि मोबाइल नहीं चलाना है, बल्कि यह भी बताएं कि पढ़ाई, नींद और खेल के लिए समय देना क्यों जरूरी है।
बच्चे के सामने खुद भी रखें अच्छा उदाहरणमाता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। आप बच्चे से कितना भी कहें कि झूठ नहीं बोलना चाहिए, अगर वह आपको छोटी-छोटी बातों में झूठ बोलते देखेगा तो आपकी बात का असर कम हो जाएगा। इसी तरह सम्मान से बात करना, गुस्से में संयम रखना, घर के कामों में सहयोग करना और दूसरों की मदद करना जैसी बातें बच्चे देखकर सीखते हैं। इसलिए बच्चों में अच्छी आदतें डालने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें केवल समझाना नहीं, बल्कि खुद अपने व्यवहार में उन आदतों को अपनाना है। आपका रोज का व्यवहार उनके लिए किसी किताब से ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है।
तुलना नहीं, बच्चे की अपनी खूबियों को पहचानेंहर बच्चा अलग होता है। किसी की पढ़ाई अच्छी हो सकती है, तो किसी की रचनात्मकता, खेल, संगीत या लोगों से बातचीत करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। इसलिए बच्चे की तुलना उसके भाई-बहन, पड़ोसी या किसी दोस्त से करने से बचें। लगातार तुलना करने से बच्चे के आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है। इसके बजाय उसकी रुचियों को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें। जब बच्चा महसूस करता है कि उसके माता-पिता उसकी खूबियों को समझते हैं, तो वह खुद पर भरोसा करना सीखता है।
प्यार के साथ सीमाएं तय करना भी जरूरीबच्चे को प्यार देना बेहद जरूरी है, लेकिन हर मांग पूरी कर देना अच्छी पैरेंटिंग नहीं है। उसे यह समझना भी जरूरी है कि हर इच्छा तुरंत पूरी नहीं हो सकती। स्क्रीन टाइम, पढ़ाई, सोने का समय, खाने की आदतों और व्यवहार को लेकर स्पष्ट लेकिन व्यावहारिक सीमाएं तय करें। इन नियमों में उम्र के साथ बदलाव भी करते रहें। सबसे जरूरी बात यह है कि नियम बनाते समय बच्चे को सम्मान दें और खुद भी उन्हें लगातार निभाएं। प्यार, भरोसे और अनुशासन का यही संतुलन बच्चे को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनने में मदद करता है।
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