Health Tips : धूल-धुएं और प्रदूषण के प्रकोप से फेफड़ों को बचाएगी होम्योपैथी, जानिए लक्षण आधारित सटीक समाधान
By: Team Aapkisaheli | Posted: 19 Aug, 2026
हैल्थ डेस्क। जयपुर हवा में लगातार बढ़ता धुआं, धूल और पार्टिकुलेट प्रदूषण न केवल सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर भी गहरा आघात कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और दमा या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए यह जहरीली हवा बेहद खतरनाक साबित हो रही है।
ईएनएसओ से जुड़ी सूखे की परिस्थितियों और धूल भरी आंधियों के कारण सांस में रुकावट, सीने में जकड़न, लगातार सूखी खांसी, गले में खराश और घरघराहट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे संकट के समय में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति केवल लक्षणों को अस्थायी रूप से दबाने के बजाय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और श्वसन तंत्र को जड़ से मजबूत करने का एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प प्रदान करती है।
जयपुर के
वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. एन. सी. पंवार बताते हैं कि प्रदूषण जनित विकारों का उपचार मरीज के विशिष्ट लक्षणों और उसकी शारीरिक प्रकृति के आधार पर किया जाता है। यदि जहरीले धुएं और धूल के कारण सीने में भारीपन, बेचैनी, दम घुटने जैसा अहसास और रात में सांस फूलने की समस्या हो रही हो, तो Arsenic Album दवा अत्यंत गुणकारी मानी जाती है। वहीं जब सीने में अत्यधिक बलगम जमा होने से सांस लेते समय घरघराहट की तेज आवाज आए, पर खांसी के बावजूद कफ बाहर न निकले और साथ में उल्टी जैसा मन हो, तो इपेकाक (Ipecacuanha) राहत दिलाती है।
इसी तरह अचानक धूल या ठंडी हवा के संपर्क में आने पर शुरू होने वाली तीखी, सूखी खांसी और बेचैनी में एकोनाइट नेपेलस (Aconite) दवा प्रभावी साबित होती है। इसके अलावा, प्रदूषण से होने वाले कफ विकार और ब्रोंकाइटिस में श्वसन नलियों को राहत देने के लिए जस्टिसिया अधातोडा (Justicia Adhatoda) तथा गले के तीव्र दर्द व खराश में हिपर सल्फ (Hepar Sulph) का प्रयोग किया जा सकता है।
डॉ. पंवार बताते हैं कि औषधीय उपचार के साथ-साथ रोजमर्रा की दिनचर्या में गुनगुना पानी पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखना, बंद नाक और गले की जकड़न के लिए दिन में एक-दो बार भाप लेना तथा बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना अत्यंत आवश्यक है।
फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए घर के अंदर रहकर प्राणायाम का अभ्यास भी लाभकारी रहता है। हालांकि, होम्योपैथिक दवाओं की सही खुराक और पोटेंसी व्यक्तिगत लक्षणों पर निर्भर करती है, इसलिए बिना योग्य चिकित्सक के परामर्श के स्वयं दवा न लें। सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई या सीने में तेज दर्द होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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