Health Advice : सिर्फ थकान नहीं, न्यूरोलॉजिकल समस्या की निशानी भी हो सकती है जम्हाई, न करें नजरअंदाज
By: Team Aapkisaheli | Posted: 13 Apr, 2026
हैल्थ डेस्क। नई दिल्ली
अक्सर लोग जम्हाई को एक सामान्य आदत मानकर नजर अंदाज कर देते हैं। सुबह उठते समय, काम के बीच या खाली बैठे हुए अगर जम्हाई आ जाए तो इसे नींद की कमी या थकान से जोड़ दिया जाता है, लेकिन हाल के वैज्ञानिक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कई बार जम्हाई लेना शरीर के भीतर चल रही गड़बड़ियों का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इस पर ध्यान देना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जम्हाई लेना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो दिमाग और शरीर के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, लेकिन जब यह प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो यह संकेत है कि शरीर के कुछ सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बार-बार जम्हाई आने का संबंध दिमाग की कार्यप्रणाली से जुड़ा हो सकता है। कुछ मामलों में यह मिर्गी या स्ट्रोक जैसे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इन स्थितियों में दिमाग के कुछ हिस्सों की गतिविधि प्रभावित होती है, जिससे शरीर में असामान्य प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर जब दिमाग का कोई हिस्सा असंतुलित तरीके से सक्रिय हो जाता है, तो व्यक्ति को बार-बार जम्हाई आने लगती है। इसलिए अगर जम्हाई के साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इसके अलावा, जम्हाई का संबंध शरीर के ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी होता है। यह तंत्र दिल की धड़कन, रक्तचाप और पाचन जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। जब इस सिस्टम में असंतुलन होता है, तो शरीर की प्रतिक्रिया भी बदलने लगती है और इसका असर जम्हाई के रूप में दिख सकता है।
कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि जम्हाई लेते समय शरीर में नसों के संकेत बदलते हैं और एक खास प्रकार का तंत्र ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर थोड़ी देर के लिए आराम की स्थिति में चला जाता है।
हालांकि हर बार जम्हाई आना किसी बीमारी का संकेत नहीं होता।
कई बार यह केवल नींद की कमी, ज्यादा काम, मानसिक तनाव या थकावट के कारण भी हो सकता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे और बिना किसी कारण के बार-बार जम्हाई आने लगे, तो सावधान हो जाना चाहिए। खासतौर पर जब इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह शरीर का चेतावनी संकेत हो सकता है।
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