Gardening : गमले में उगेगा 5 किलो का कद्दू घर की छत को ऐसे बनाएं मिनी फार्म
By: Team Aapkisaheli | Posted: 10 Jun, 2026
आज के समय में बाजार में मिलने वाली सब्जियों में कीटनाशकों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब लोग सेहत से समझौता करने के बजाय खुद किसान बनने की राह पर निकल पड़े हैं। शहरों में कद्दू की होम गार्डनिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कम जगह और बेहद मामूली खर्च में यह बेल छतों और बालकनी की रौनक बढ़ा रही है।
सही कंटेनर का चुनाव सबसे पहला कदम है:
कद्दू उगाने की शुरुआत हमेशा सही आकार के गमले से होती है। चूंकि इसकी बेल काफी तेजी से फैलती है और फल का वजन भी ज्यादा होता है, इसलिए कम से कम चौदह से सोलह इंच गहरे ग्रो बैग या बड़े प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल करना चाहिए। गमले के निचले हिस्से में जल निकासी के लिए पर्याप्त छेद होना जरूरी है ताकि जड़ों में पानी जमा न हो।
मिट्टी की ताकत से मिलेगी बंपर पैदावार:
कद्दू के पौधे को भरपूर पोषण की जरूरत होती है। इसके लिए सामान्य मिट्टी में आधी मात्रा में वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद मिलाकर एक बेहतरीन मिश्रण तैयार किया जाता है। बीजों को मिट्टी के अंदर लगभग एक इंच की गहराई पर बोया जाता है। नियमित रूप से हल्की सिंचाई करने पर महज एक हफ्ते के भीतर छोटे-छोटे पौधे मिट्टी से बाहर मुस्कुराने लगते हैं।
मचान विधि से बेलों को दें सहारा:
जब कद्दू की बेल बड़ी होने लगे, तो उसे जमीन पर फैलाने के बजाय किसी मजबूत रस्सी बांस या लोहे के ऊंचे फ्रेम पर चढ़ा देना चाहिए। इस वर्टिकल गार्डनिंग तकनीक से जगह की भारी बचत होती है और हवा का वेंटिलेशन अच्छा रहने से फल सड़ने का खतरा भी खत्म हो जाता है।
धूप और पानी का सही संतुलन है जरूरी:
इस पौधे को रोजाना कम से कम छह घंटे की सीधी धूप मिलना अनिवार्य है। पानी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि मिट्टी में सिर्फ नमी बनी रहे न कि वह हर समय कीचड़ जैसी गीली दिखे। अत्यधिक पानी देने से फूल झड़ने लगते हैं और पौधे की ग्रोथ रुक जाती है।
घरेलू नुस्खों से भगाएं कीड़े-मकौड़े:
पूरी तरह से ऑर्गेनिक कद्दू पाने के लिए रासायनिक दवाओं से दूरी बनाना ही समझदारी है। अगर पत्तों पर किसी तरह के कीट या फंगस का हमला दिखाई दे तो नीम के तेल को पानी में मिलाकर स्प्रे करना सबसे सुरक्षित और असरदार तरीका माना जाता है।
कुछ ही हफ्तों में आता है पहला फल:
बीज लगाने के कुछ ही हफ्तों बाद पूरी बेल पीले और बड़े-बड़े खूबसूरत फूलों से लद जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे छोटे कद्दू आकार लेना शुरू कर देते हैं। घर की छत पर बिना किसी केमिकल के तैयार हुआ यह कद्दू न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि परिवार को एक बेहतरीन सेहत का तोहफा भी देता है।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
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