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संस्कार की नींवः कैसे संवारें अपने बच्चे का व्यक्तित्व

By: Team Aapkisaheli | Posted: 12 Apr, 2026

संस्कार की नींवः कैसे संवारें अपने बच्चे का व्यक्तित्व
बच्चों का कोमल मन उस गीली मिट्टी की तरह होता है जिसे जैसा आकार दिया जाए वह वैसा ही बन जाता है। बचपन में हम उनके व्यवहार और आदतों में जो निवेश करते हैं वही आगे चलकर उनके चरित्र और भविष्य का निर्धारण करता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक जिम्मेदार और सफल इंसान बने, तो उसके पालन-पोषण में इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। 
संवाद की कला और धैर्यः 
अक्सर हम बच्चों को बोलना तो सिखाते हैं, लेकिन सुनना सिखाना भूल जाते हैं। एक अच्छा व्यक्तित्व वही है जो दूसरों की बात को गहराई और धीरज के साथ सुने। बच्चों में बचपन से ही दूसरों को सम्मान देने और उनकी बात सुनने की आदत डालें। इससे न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि होगी बल्कि वे दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील भी बनेंगे। 

रटने के बजाय रचनात्मकता को बढ़ावाः 
शिक्षा का अर्थ केवल किताबों को रटना या दूसरों की नकल करना नहीं है। बच्चों को खुद से सोचने और समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए प्रेरित करें। उन्हें पेंटिंग खिलौने बनाना या किसी कविता को अपने ढंग से सुनाने जैसे रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें। जब बच्चा अपनी बुद्धि का उपयोग मौलिक तरीके से करता है तो उसका आत्मविश्वास और मानसिक क्षमता दोनों बढ़ते हैं। 

विपरीत परिस्थितियों में मानसिक मजबूतीः 
जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है। बच्चों को सिखाएं कि बुरा समय स्थायी नहीं होता। चाहे स्कूल में कम अंक आए हों या खेल में हार मिली हो उन्हें सिखाएं कि धैर्य कैसे रखा जाता है। उन्हें महापुरुषों की प्रेरक कहानियाँ सुनाएं ताकि वे मुश्किलों से घबराने के बजाय उनका सामना करना सीखें। 

निडर और स्वतंत्र स्वभावः 
आजकल के दौर में माता-पिता बच्चों को लेकर अत्यधिक सुरक्षात्मक हो गए हैं जिससे बच्चों में डर पैदा होने लगता है। उन्हें गिरने चोट लगने या धूल-मिट्टी में खेलने से इतना न रोकें कि वे डरे-सहमे रहने लगें। उन्हें सिखाएं कि अगर वे गिरेंगे तो फिर से खड़े होने की ताकत भी उन्हीं के पास है। एक साहसी बच्चा ही भविष्य की चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर पाएगा। 

एक खास बातः 

वर्तमान का भरपूर आनंद लेंः 
सफलता केवल किसी लक्ष्य को प्राप्त करने में नहीं है बल्कि उस सफर को जीने में भी है। काम के साथ-साथ खुश रहना सीखें और यही बात बच्चों को भी सिखाएं। जब हम प्रसन्न मन से कोई कार्य करते हैं, तो सफलता की राह न केवल आसान होती है बल्कि जीवन में संतुलन भी बना रहता है। अपनी मेहनत और हर छोटे पल का जश्न मनाना ही असल खुशहाली है। 

-हेमलता शर्मा, जयपुर

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