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आंखों में जलन औऱ खुजली आम बात नहीं, समय पर इलाज न करवाने से नाजुक परत को हो सकता है नुकसान

By: Team Aapkisaheli | Posted: 09 Mar, 2026

आंखों में जलन औऱ खुजली आम बात नहीं, समय पर इलाज न करवाने से नाजुक परत को हो सकता है नुकसान
हैल्थ डेस्क। नई दिल्ली 
हमारी आंखें शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आजकल लोग घंटों मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर समय बिताते हैं और मौसम के बदलाव के साथ धूल, धुआं और प्रदूषण भी आंखों पर असर डालते हैं। ये सब मिलकर आंखों में खुजली और जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अक्सर लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। 

आंखों में खुजली और जलन सबसे आम समस्या है। इसकी वजह मौसम बदलना, एलर्जी, आंखों में इंफेक्शन या लंबे समय तक स्क्रीन देखने जैसी आदतें हो सकती हैं। धूल-मिट्टी, धुआं और प्रदूषण भी आंखों की नाजुक परत को प्रभावित करते हैं और जलन या लालिमा का कारण बनते हैं। 

शुरुआत में ये समस्या हल्की लग सकती है और आम उपायों से ठीक भी हो सकती है लेकिन अगर कुछ दिनों तक आराम न मिले तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। आंखों की जलन और खुजली के लिए सबसे आम कारण एलर्जी और इंफेक्शन हैं। 

एलर्जी के कारण आंखें लाल, खुजली वाली और पानी आने जैसी स्थिति में आ जाती हैं। वहीं इंफेक्शन की वजह से आंखों में दर्द, जलन और सूजन हो सकती है। शुरुआत में आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोना सबसे सरल और सुरक्षित उपाय है। साथ ही, कोई भी आई ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल किए जाने चाहिए। 

आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए रोजाना पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और विटामिन ए व ओमेगा‑3 फैटी एसिड वाली चीजें खाने से आंखों की रोशनी बनी रहती है। स्वच्छता पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। हाथ व चेहरे को हमेशा साफ रखें और आंखों को बार-बार छूने से बचें। प्रदूषण और धूल भरी जगहों पर चश्मा पहनें।

आंखों में खुजली होने पर जोर से रगड़ना बिल्कुल भी नहीं चाहिए, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान और संक्रमण बढ़ सकता है। घरेलू नुस्खों जैसे गुलाब जल या अन्य तरल पदार्थ का बिना सलाह के इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। 

अगर 2-3 दिन में हल्के उपायों से आराम न मिले तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स का उपयोग गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर जांच और सही देखभाल से छोटी‑छोटी समस्याएं गंभीर रूप नहीं लेती और आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है।

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