दो दीवाने सहर में को ओटीटी पर मिल रहे प्यार पर सिद्धांत चतुर्वेदी ने कहा- हर शशांक को उसकी रोशनी मिले

By: Team Aapkisaheli | Posted: 22 Apr, 2026

दो दीवाने सहर में को ओटीटी पर मिल रहे प्यार पर सिद्धांत चतुर्वेदी ने कहा- हर शशांक को उसकी रोशनी मिले
बॉलीवुड डेस्क। मुंबई 

दो दीवाने सहर में को ओटीटी पर मिल रहे दर्शकों की बेपनाह प्यार से खुश होकर सिद्धांत चतुर्वेदी ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर एक दिल से लिखा हुआ नोट शेयर किया है। इस नोट के ज़रिए सिद्धांत ने बताया है कि वे लगातार अपने डीएम, टैग्स और फैन एडिट्स देख रहे हैं और यह उनके लिए बेहद खूबसूरत एहसास है कि लोग इस कहानी से इतना गहरा जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे में उनका यह पोस्ट एक सामान्य सोशल मीडिया अपडेट से ज्यादा, एक भावनात्मक धन्यवाद बन चुका है। 

बिहाइंड-द-सीन्स वीडियो के साथ उन्होंने लिखा है, प्यार परफेक्ट होने में नहीं… साथ निभाने में है, और प्यार की तलाश में, उस इंसान में अपने ही टूटे हुए हिस्से को ढूंढ लेना… जो आपकी तरह ही अधूरा है, लेकिन फिर भी उसमें आपको सिर्फ रोशनी दिखती है, तो यह खूबसूरत एहसास है। 

हमारी फिल्म दो दीवाने सहर में में शशांक और रोशनी दोनों अपनी-अपनी कमियों के साथ जी रहे हैं, बिना यह जाने कि उन्हें स्वीकार किया जाएगा या नहीं…थोड़े खोए हुए, थोड़े लेटलतीफ़, और प्यार की भाषा को लेकर थोड़े अनजान। लेकिन यही चीज उन्हें खास बनाती है। ना बड़े-बड़े इशारे, ना मेलोड्रामा… बल्कि शब्दों के बीच की खामोशी, पकड़ने से पहले की झिझक, और यह छोटी-सी उम्मीद कि शायद…वे एक-दूसरे के लिए काफी हैं। 

यह फिल्म हमेशा का वादा नहीं करती…यह आपको उसकी तलाश में छोड़ देती है… और उसी तलाश में, इस शहर की टूटी-फूटी रफ्तार के बीच, यह हमें स्वीकार करना सिखाती है। आप सभी का धन्यवाद, जिन्होंने इस फिल्म को इतने प्यार से अपनाया। मैं आपके सभी मैसेज, टैग्स और एडिट्स देख रहा हूँ… यह बहुत खास है कि आप इस कहानी में खुद को ढूंढ पा रहे हैं। और मैं उम्मीद करता हूँ कि हर शशांक… अपने समय पर, धीरे-धीरे… अपनी रोशनी पा ले। 

गौरतलब है कि अपने शब्दों के जरिए सिद्धांत प्यार को परफेक्ट या तयशुदा चीज़ मानने की बजाय इसके उस सादे और सच्चे पहलू पर जोर देते हैं, जहां झिझक, समय और भावनात्मक दूरी भी रिश्ते को उतना ही आकार देती है जितना कि प्यार खुद। सिर्फ यही नहीं शशांक और रोशनी को थोड़ा खोया और थोड़ा लेट बताकर, उन्होंने फिल्म के मूल भाव को सामने लाया है, एक ऐसा प्यार जो अधूरेपन, खामोशियों और अनकहे एहसासों में बसता है। 

उनके मुताबिक, यही छोटे और सधे हुए पल इस कहानी को यादगार बनाते हैं। सिद्धांत का यह नोट यह भी दिखाता है कि वह दर्शकों के रिएक्शन्स से कितनी करीब से जुड़े हुए हैं। उनके लिए असली असर इसी साझा भावनात्मक जुड़ाव में है, जहां लोग सिर्फ फिल्म नहीं देख रहे हैं, बल्कि उसमें अपनी ज़िंदगी के हिस्से भी महसूस कर रहे हैं। आज के दौर में, जहां इंडस्ट्री अक्सर बड़े स्केल और भव्यता पर टिकी होती है, वहां सिद्धांत का यह संदेश सादगी की तरफ लौटता दिखाई देता है, जहां प्यार, स्वीकार और बस काफी होना ही सबसे बड़ी बात है।

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