Health Tips : अगर बार-बार करता है गहरी सांस लेने का मन, चिंता और पाचन हैं इसकी मुख्य वजह
By: Team Aapkisaheli | Posted: 14 Apr, 2026
खास खबर। मुंबई सांस लेने की प्रक्रिया बहुत आसान है और अगर इस प्रक्रिया को लेने में शरीर को मेहनत करनी पड़ रही है, तो समझ लें कि शरीर के भीतर कुछ अलग हो रहा है। कई बार गहरी-गहरी सांस लेने का मन करता है क्योंकि फेफड़े ठीक से सांस नहीं ले पाते और हम खुद से गहरी सांस लेकर आराम महसूस करते हैं। इसका कारण फेफड़ों पर पड़ने वाला दबाव है, इसे हल्के में मत लें।
ये सिर्फ सांस की समस्या नहीं बल्कि पाचन की गड़बड़ी और तनाव का प्रभाव है।
बार-बार गहरी सांस लेना शरीर के अंदर चल रही गड़बड़ियों को दिखाता है। जब शरीर के अंदर गैस बार-बार और ज्यादा बनने लगती है, तो फेफड़ों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलता है। सीने में एक अजीब सा दबाव महसूस होता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है और मन परेशान होने लगता है।
मन व शरीर का गहरा संबंध है।
शारीरिक गड़बड़ी मन को भी विचलित कर देती है। यह ओवरथिंकिंग, चिंता और तनाव को बढ़ावा देती है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि इससे बेचैनी, सीने में जलन, एंग्जायटी और नींद भी प्रभावित होती है व पूरा शरीर अपना संतुलन खो बैठता है।
शरीर तन से ही नहीं बल्कि मन से भी कमजोर महसूस करता है।
अब जानते हैं कि इस परेशानी का समाधान क्या हो सकता है। सबसे पहले अपने पाचन तंत्र को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। पाचन तंत्र मजबूत होगा तो पेट से जुड़ी परेशानी जैसे गैस बनना और खट्टी डकार का समाधान मिल जाएगा और फेफड़ों पर दवाब भी कम पड़ेगा।
दूसरा मन को संतुलित रखना भी बहुत जरूरी है। मन अगर परेशान है तो पूरे शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
इसके लिए रोज कुछ समय अपने लिए निकालें और योग करें। योग तनाव को कम करने में बहुत कारगर है। इसके लिए बालासन, पश्चिमोत्तानासन, शवासन और मार्जरीआसन कर सकते हैं। सांस लेने में होने वाली तकलीफों से निजात पाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम और भस्त्रिका प्राणायाम भी कर सकते हैं। कोशिश करें कि प्रकृति के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। प्रकृति के स्पर्श से मन हल्का होता है।
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