तेल कीमतों में उछाल से पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव, महंगाई और संकट गहराने की आशंका

By: Team Aapkisaheli | Posted: 01 May, 2026

तेल कीमतों में उछाल से पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव, महंगाई और संकट गहराने की आशंका
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक तेल कीमतों में साफ दिखने लगा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पिछले आधी सदी में अपने सबसे गंभीर ईंधन मूल्य संकट का सामना कर रहा है। यह स्थिति आर्थिक समस्याओं को गहरा कर सकती है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को जड़ से हिला सकती है। 

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर पाकिस्तान पर खास तौर पर भारी पड़ा है, क्योंकि देश आयातित ऊर्जा और खाड़ी देशों से आने वाले रिमिटेंस पर काफी निर्भर है। साथ ही, उसका भुगतान संतुलन पहले से ही कमजोर स्थिति में है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष विदेशों में काम कर रहे श्रमिकों, खासकर खाड़ी देशों में कार्यरत मजदूरों से आने वाले रिमिटेंस को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि संघर्ष से पहले जहां पाकिस्तान का तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर था, वहीं अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इससे पिछले दो वर्षों में हुई आर्थिक प्रगति लगभग खत्म हो गई है। 

रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पूरे अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कृषि, परिवहन से लेकर खाद्य पदार्थों और जरूरी सामानों की कीमतों तक, जिससे पहले से ही गंभीर महंगाई संकट और बढ़ेगा। 

अर्थशास्त्री कमरान बट ने द डॉन से कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि से पूरी अर्थव्यवस्था में एक शृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया होती है। इससे लोगों की क्रय शक्ति घटेगी, गरीबी और बेरोजगारी बढ़ेगी, आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ेंगी और सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ेगा। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बढ़ते आर्थिक जोखिमों का हवाला देते हुए अपनी नीतिगत ब्याज दर 1 प्रतिशत बढ़ाकर 11.5 प्रतिशत कर दी है। 

बैंक ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतें, माल ढुलाई शुल्क और बीमा प्रीमियम अब भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी ऊपर हैं और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान से अनिश्चितता बनी हुई है। सरकार के सामने कठिन विकल्प है—या तो बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं पर डाली जाए या ईंधन पर सब्सिडी दी जाए। 

हालांकि, सब्सिडी बढ़ाने से बजट घाटा बढ़ेगा, जिस पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तों के कारण सीमाएं हैं। अर्थशास्त्री कैसर बंगाली ने कहा कि पाकिस्तान ऐसी स्थिति में है जहां केवल 1 अरब डॉलर की छोटी सी वित्तीय सहायता भी देश के लिए जीवित रहने और आर्थिक पतन के बीच अंतर पैदा कर सकती है। -आईएएनएस

5 घरेलू उपचार,पुरूषों के बाल झडना बंद

हर मर्द में छिपी होती है ये 5 ख्वाहिशें

क्या सचमुच लगती है नजर !


Mixed Bag

Ifairer


Warning: PHP Startup: Unable to load dynamic library '/opt/cpanel/ea-php54/root/usr/lib64/php/modules/xsl.so' - /lib64/libxslt.so.1: symbol xmlGenericErrorContext, version LIBXML2_2.4.30 not defined in file libxml2.so.2 with link time reference in Unknown on line 0