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Parenting Tips: क्या आपका बच्चा भी है बहुत शर्मिला, तो इस तरह बनाएं मिलनसार

By: Team Aapkisaheli | Posted: 13 Feb, 2026

Parenting Tips: क्या आपका बच्चा भी है बहुत शर्मिला, तो इस तरह बनाएं मिलनसार
कई बच्चे स्वभाव से ही शांत और शर्मीले होते हैं। वे नई जगह, नए लोगों या भीड़ में जाने से कतराते हैं और खुलकर बात करने में झिझक महसूस करते हैं। माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर चिंतित हो जाते हैं कि कहीं बच्चे का यह स्वभाव उसके आत्मविश्वास और भविष्य पर असर न डाल दे। हालांकि शर्मीलापन कोई कमजोरी नहीं है, लेकिन समय रहते सही मार्गदर्शन न मिले तो बच्चा खुद को दूसरों से अलग महसूस करने लगता है। सही परवरिश, प्यार और समझदारी से शर्मीले बच्चे को भी मिलनसार और आत्मविश्वासी बनाया जा सकता है।
बच्चे के स्वभाव को समझें, उस पर दबाव न बनाएं

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चे जल्दी घुल-मिल जाते हैं, जबकि कुछ को समय लगता है। बच्चे को बार-बार यह कहना कि “तुम बहुत शर्माते हो” या “दूसरों जैसे क्यों नहीं हो” उसके आत्मविश्वास को और कमजोर कर सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे के स्वभाव को स्वीकार करें और धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ने का मौका दें। जब बच्चा सुरक्षित और स्वीकार्य महसूस करता है, तो वह खुद-ब-खुद खुलने लगता है।

घर का माहौल रखें खुला और संवादपूर्ण
शर्मीले बच्चों के लिए घर का माहौल बहुत मायने रखता है। अगर घर में बातचीत का माहौल खुला होगा, तो बच्चा भी अपनी बात रखने में सहज महसूस करेगा। रोज़ाना बच्चे से उसके दिन के बारे में पूछें, उसकी बातें ध्यान से सुनें और उसे बीच में न टोकें। जब बच्चा देखता है कि उसकी बातों को महत्व दिया जा रहा है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह दूसरों से बात करने में भी कम झिझकता है।

छोटे-छोटे सोशल एक्सपीरियंस दिलाएं

शर्मीले बच्चे को सीधे बड़ी भीड़ में धकेलने के बजाय छोटे कदम उठाएं। पहले किसी एक दोस्त के साथ खेलने का मौका दें, फिर धीरे-धीरे ग्रुप एक्टिविटी में शामिल करें। पार्क, बर्थडे पार्टी या रिश्तेदारों के घर जाना बच्चे के लिए अच्छा अभ्यास हो सकता है। छोटे-छोटे सकारात्मक अनुभव बच्चे को यह सिखाते हैं कि नए लोगों से मिलना डरावना नहीं होता।

तारीफ और प्रोत्साहन से बढ़ाएं आत्मविश्वास
जब भी बच्चा किसी से बात करने की कोशिश करे या नया कदम उठाए, उसकी तारीफ ज़रूर करें। यह तारीफ बहुत बड़ी नहीं, बल्कि सच्ची और दिल से होनी चाहिए। “तुमने आज बहुत अच्छा किया” जैसे शब्द बच्चे के मन में सकारात्मक असर डालते हैं। इससे उसे यह महसूस होता है कि उसकी कोशिशें मायने रखती हैं और वह आगे भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होता है।

खुद बनें बच्चे के रोल मॉडल

बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अगर आप खुद लोगों से खुलकर बात करेंगे, शिष्टाचार दिखाएंगे और आत्मविश्वास के साथ पेश आएंगे, तो बच्चा भी वही अपनाएगा। आपका व्यवहार ही बच्चे की सबसे बड़ी सीख बनता है।

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