Parenting Tips: सोशल मीडिया पर रील्स देखकर बिगड़ रहे हैं बच्चे, तो ऐसे करें कंट्रोल
By: Team Aapkisaheli | Posted: 24 Jun, 2026
आज के समय में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। कुछ मिनट के मनोरंजन के लिए बनाई गई रील्स कई बार बच्चों की आदत बन जाती हैं। घंटों तक लगातार रील्स देखने से बच्चों की पढ़ाई, नींद, व्यवहार और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। कई बच्चे बाहर खेलना, किताबें पढ़ना और परिवार के साथ समय बिताना कम कर देते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर दिखने वाले कुछ कंटेंट उनकी उम्र के हिसाब से सही भी नहीं होते। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को पूरी तरह रोकने की बजाय सही दिशा दिखाएं। अगर समय रहते इस आदत पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्क्रीन एडिक्शन का रूप ले सकती है।
स्क्रीन टाइम के लिए तय करें नियमबच्चों को बिना किसी सीमा के फोन देना सही नहीं है। माता-पिता को स्क्रीन टाइम के लिए कुछ स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। उदाहरण के लिए, पढ़ाई पूरी करने के बाद ही फोन इस्तेमाल करना या दिन में केवल एक निश्चित समय तक सोशल मीडिया देखने की अनुमति देना। जब बच्चे शुरुआत से ही नियमों का पालन करना सीखते हैं, तो वे धीरे-धीरे संतुलित तरीके से तकनीक का उपयोग करना सीख जाते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि नियम पूरे परिवार के लिए समान हों, ताकि बच्चे उन्हें आसानी से स्वीकार कर सकें।
बच्चों को दूसरे एक्टिविटी में करें व्यस्तअगर बच्चा हर समय फोन मांगता है, तो उसकी ऊर्जा को दूसरी सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ने की जरूरत है। उसे आउटडोर गेम्स, ड्रॉइंग, डांस, म्यूजिक या किताबें पढ़ने जैसी एक्टिविटी में शामिल करें। जब बच्चों को मजेदार और रचनात्मक विकल्प मिलते हैं, तो उनका ध्यान स्क्रीन से अपने आप कम होने लगता है। परिवार के साथ खेलना या घूमने जाना भी बच्चों को डिजिटल दुनिया से बाहर निकालने में मदद करता है।
खुद भी बनें अच्छा उदाहरणबच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर के बड़े हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों से फोन कम इस्तेमाल करने की उम्मीद करना मुश्किल होगा। इसलिए माता-पिता को भी अपने स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए। खाने के समय, बातचीत के दौरान और परिवार के साथ समय बिताते वक्त मोबाइल से दूरी बनाना बच्चों के लिए एक अच्छा उदाहरण साबित हो सकता है।
बच्चों से खुलकर करें बातचीतरील्स देखने पर केवल डांटना या फोन छीन लेना हमेशा सही समाधान नहीं होता। बच्चों से यह समझाने की कोशिश करें कि ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके स्वास्थ्य, पढ़ाई और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकता है। जब बच्चे किसी बात के पीछे का कारण समझते हैं, तो वे उसे ज्यादा आसानी से स्वीकार करते हैं। प्यार, समझदारी और सही मार्गदर्शन के साथ बच्चे सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग करना सीख सकते हैं और स्वस्थ आदतें विकसित कर सकते हैं।
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