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मौनी अमावस्या : ईश्वर और पितरों की आराधना, दान-पुण्य का विशेष दिन, मिलेगी पितृदोष से शांति

By: Team Aapkisaheli | Posted: 17 Jan, 2026

मौनी अमावस्या : ईश्वर और पितरों की आराधना, दान-पुण्य का विशेष दिन, मिलेगी पितृदोष से शांति
नई दिल्ली। माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या भी कहते हैं, जो सनातन धर्म में विशेष दिन है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और मौन व्रत धारण करते हैं। यह दिन ईश्वर के साथ-साथ पूर्वजों की आराधना के लिए भी बेहद खास माना जाता है। 
पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है। मौन रहना सबसे बड़ा तप माना जाता है, क्योंकि इससे मन शांत होता है, विचार संयमित रहते हैं और आत्म-चिंतन बढ़ता है। मान्यता है कि मौन से वाणी की शुद्धि होती है, पापों का नाश होता है तथा आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह व्रत पूर्वजों की कृपा और पितृदोष निवारण के लिए भी विशेष फलदायी है। 

दृक पंचांग के अनुसार,18 जनवरी को मौनी अमावस्या है, अमावस्या 18 जनवरी को रात 1 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 19 जनवरी तक रहेगी। इस दिन रविवार होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है। सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 49 मिनट पर होगा। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद उत्तराषाढ़ा शुरू होगा। वहीं, हर्षण योग शाम 9 बजकर 11 मिनट तक और करण चतुष्पाद दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल दोपहर 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य न करें। 

धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर साधना, पूजा और ध्यान करना विशेष फलदायी होता है। इस पावन तिथि पर देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं। मौन व्रत रखकर किया गया स्नान, दान और पूजा पितरों को अत्यंत प्रसन्न करती है। इससे पितृदोष दूर होता है, पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति, समृद्धि बनी रहती है। माघ मास की यह अमावस्या प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, जहां लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। यह दिन आत्मिक शुद्धि, पाप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का भी अवसर है। 

मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इस दिन संभव हो सके तो नदी में स्नान करना चाहिए, यदि आपके घर के पास नदी नहीं है तो त्रिवेणी का ध्यान कर घर में स्नान करने से नदी में स्नान करने का फल मिलता है। मौन रहकर ध्यान और ईश्वर की आराधना करें। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें और उन्हें काले तिल, कुश और जल से दक्षिण दिशा मुख करके अर्घ्य दें। पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष विधान है। 

मौनी अमावस्या पर मौन साधना, स्नान-दान और पितृ पूजा से जीवन में नकारात्मकता दूर होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धर्म शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किया दान-पुण्य कई गुना फल देता है। अपनी सामर्थ्य अनुसार काले तिल, गुड़, घी, अन्न, चावल, आटा, गर्म कपड़े, पका हुआ भोजन, फल, धन दान करना चाहिए। गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्य देता है। ये दान गुप्त रूप से करना उत्तम माना जाता है। भगवान विष्णु और शिव की पूजा भी करें।


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