हनुमान जी को अमरत्व कैसे मिला? जानें चिरंजीवी होने की पौराणिक कथा
By: Team Aapkisaheli | Posted: 30 Oct, 2026
हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी आज भी इस संसार में मौजूद हैं और जहां सच्चे मन से भगवान श्रीराम का नाम लिया जाता है, वहां उनकी कृपा बनी रहती है। यही वजह है कि उन्हें चिरंजीवी यानी लंबे समय तक जीवित रहने वाले देवताओं में गिना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को अमर होने का वरदान कैसे मिला? पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके बाद अलग-अलग देवताओं ने उन्हें विशेष शक्तियां और आशीर्वाद दिए। इन वरदानों ने हनुमान जी को असाधारण बल और सामर्थ्य प्रदान किया। उनकी अमरता से जुड़ी मान्यताएं केवल चमत्कार की कहानी नहीं हैं, बल्कि इनमें भक्ति, धर्म की रक्षा और भगवान के प्रति समर्पण का संदेश भी छिपा है।
बचपन में ही देवताओं से मिले थे विशेष वरदानपौराणिक कथा के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही बेहद शक्तिशाली और चंचल थे। एक बार उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को कोई फल समझ लिया और उसे खाने के लिए उसकी ओर उड़ चले। उस समय देवराज इंद्र ने उन्हें रोकने के लिए अपने वज्र से प्रहार किया। इससे हनुमान जी की ठोड़ी पर चोट लगी और वे मूर्छित हो गए। अपने पुत्र की यह हालत देखकर पवनदेव क्रोधित हो गए और उन्होंने वायु का प्रवाह रोक दिया। इससे संसार में जीवन संकट में पड़ गया। तब देवताओं ने पवनदेव को शांत करने के लिए बाल हनुमान को अनेक वरदान दिए। ब्रह्मा जी सहित कई देवताओं ने उन्हें अद्भुत शक्ति, सुरक्षा और सामर्थ्य प्रदान किया। हालांकि, इन वरदानों को ही अमरत्व का एकमात्र कारण नहीं माना जाता।
भगवान श्रीराम की भक्ति से जुड़ा है चिरंजीवी होने का रहस्यरामायण की कथा में हनुमान जी का सबसे बड़ा गुण उनकी भगवान श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति है। उन्होंने माता सीता की खोज से लेकर लंका में प्रवेश करने और युद्ध में श्रीराम की सहायता करने तक हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई। मान्यता है कि हनुमान जी ने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। इसी समर्पण के कारण उन्हें विशेष कृपा प्राप्त हुई। कुछ धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने उन्हें संसार में रहकर अपने नाम का स्मरण करने वाले भक्तों की सहायता करने का आशीर्वाद दिया। इसी विश्वास के चलते हनुमान जी को चिरंजीवी कहा जाता है।
माता सीता ने भी दिया था अमर रहने का आशीर्वादलोकप्रिय रामकथा परंपराओं में एक मान्यता यह भी मिलती है कि लंका में माता सीता से मिलने के बाद हनुमान जी को उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। जब हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्रीराम का संदेश दिया, तो वे उनकी भक्ति, साहस और सेवा भाव से प्रसन्न हुईं। मान्यता के अनुसार, माता सीता ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उन्हें दिव्य कृपा प्राप्त होती रहे और वे लंबे समय तक संसार में पूजनीय बने रहें। अलग-अलग रामायणों और धार्मिक परंपराओं में इस प्रसंग का वर्णन अलग रूपों में मिलता है, लेकिन सभी में हनुमान जी की निष्ठा और सेवा भावना को विशेष महत्व दिया गया है।
कलियुग में भी क्यों पूजे जाते हैं हनुमान जीधार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी सात चिरंजीवियों में से एक हैं और कलियुग में भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। भक्त मंगलवार और शनिवार को उनकी पूजा करते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और उनसे साहस तथा संकटों से लड़ने की शक्ति मांगते हैं। हनुमान जी की अमरता का संदेश यह भी है कि सच्ची भक्ति, निस्वार्थ सेवा और धर्म के प्रति समर्पण हमेशा याद रखा जाता है। इसीलिए हनुमान जी केवल बल के देवता नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और निष्ठा के प्रतीक भी माने जाते हैं।
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