Gen Z और मिलेनियल्स के बीच बढ़ रहा है क्रॉस-जेनरेशनल डेटिंग का चलन: सर्वे में सामने आए दिलचस्प पहलू
By: Team Aapkisaheli | Posted: 30 Sep, 2026
मुंबई। डेटिंग की दुनिया लगातार बदल रही है, और अब केवल एक ही पीढ़ी के लोग आपस में डेटिंग करने तक सीमित नहीं हैं। आज के दौर में Gen Z (जेन जेड) और मिलेनियल्स के बीच क्रॉस-जेनरेशनल डेटिंग (अलग-अलग पीढ़ियों के बीच डेटिंग) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में भारतीय डेटिंग ऐप क्वाैकक्वाक द्वारा किए गए एक विस्तृत सर्वे में इस आधुनिक ट्रेंड के कई दिलचस्प और मजेदार पहलू सामने आए हैं।
अलग-अलग आदतें और संवाद की दुनियाः डेटिंग ऐप के इस सर्वे में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, जयपुर और लखनऊ समेत कई टीयर-1, टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के 22 से 35 वर्ष की आयु के 11,340 एकल (सिंगल्स) युवाओं ने हिस्सा लिया। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि इस साल क्रॉस-जेनरेशनल मैचों में लगभग 7% की बढ़ोतरी हुई है।
युवाओं का मानना है कि दो लोग जो अलग-अलग कम्यूनिकेशन की आदतों, पॉप कल्चर और रोमांस के अलग-अलग विचारों के साथ बड़े हुए हैं, वे इन सभी भिन्नताओं के बीच आपसी तालमेल बिठा रहे हैं। टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के लगभग 22% जेन-जेंस ने खुद से 8 से 9 साल बड़े पार्टनर के साथ मैच करने की बात कही। वहीं टीयर-1 शहरों में यह अंतर आमतौर पर 5 से 6 साल के आसपास देखा गया।
कम्यूनिकेशन में भाषा और मीम्स का टकरावः सर्वे के अनुसार, Gen Z अपनी नई शब्दावली (जैसे rizz, its giving, clock it) और शॉर्टकट के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, मिलेनियल पीढ़ी के लोगों को कई बार इन शब्दों को समझने में थोड़ी परेशानी होती है। सर्वे में शामिल 29 वर्ष से अधिक आयु के 37% से अधिक सिंगल्स ने माना कि उन्हें जेन-जेल एक्सप्रेशन्स को समझने में कठिनाई होती है।
इसके विपरीत, 22 से 26 वर्ष की आयु के 44% जेन-जेड युवाओं का मानना है कि पुरानी पीढ़ी ग्रामर और फॉर्मल कम्यूनिकेशन को लेकर बहुत अधिक सख्त रहती है, जबकि भावनाएं व्यक्त करने के लिए वाइब्स और इमोजी ज्यादा मायने रखते हैं।
मानसिक उम्र और आपसी सीखः सर्वे में लगभग 4,958Respondents ने साझा किया कि उनके लिए असली उम्र से ज्यादा मेंटल एज (मानसिक उम्र) मायने रखती है। 23 से 27 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं ने विशेष रूप से अधिक उम्र के पुरुषों की भावनात्मक परिपक्वता को प्राथमिकता दी। वहीं, 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं ने युवाओं की ऊर्जा और स्फूर्ति के चलते उनसे जुड़ने में अधिक रुचि दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के रिश्तों में जहां एक पीढ़ी सांस्कृतिक प्रवाह और अनुभव साझा करती है, वहीं दूसरी पीढ़ी नए दृष्टिकोण और ऊर्जा लेकर आती है, जिससे रिश्तों में सीखने का एक नया दायरा खुलता है।
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