ईरान में सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिक भेजने पर विचार कर रहे ट्रंप

By: Team Aapkisaheli | Posted: 07 Mar, 2026

ईरान में सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिक भेजने पर विचार कर रहे ट्रंप
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती में रुचि दिखाई है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में दी गई है। ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने के विचार पर गंभीर रुचि दिखाई है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस विषय पर अपने सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ चर्चा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह योजना किसी बड़े पैमाने पर आक्रमण की नहीं है बल्कि विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए सीमित संख्या में सैनिकों को तैनात करने पर केंद्रित है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। 

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने युद्ध के बाद के ईरान के लिए एक संभावित योजना भी बताई है। इसमें ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और एक नई ईरानी सरकार के साथ तेल उत्पादन में सहयोग करना शामिल हो सकता है, जो मौजूदा अमेरिका-वेनेजुएला तेल व्यवस्था के समान होगा। 

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि यह खबर अनाम स्रोतों के अनुमानों पर आधारित है और वे राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का हिस्सा नहीं हैं। ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं और यह कहना गलत है कि वे किसी एक विकल्प का समर्थन कर रहे हैं। 

इस सप्ताह ट्रंप ने न्यूयार्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जहां अन्य राष्ट्रपतियों ने जमीन पर सैनिक भेजने से इनकार किया है, वहीं उनका मानना है कि शायद इसकी जरूरत न पड़े, लेकिन अगर जरूरत हुई तो यह विकल्प हो सकता है। इस बीच यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद से अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर 3,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं और 43 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया है। 

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हमले शुरू किए थे, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए मिसाइल व ड्रोन हमले जारी रखे हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम की मांग नहीं कर रहा और उसे वॉशिंगटन के साथ बातचीत का कोई कारण नहीं दिखता। 

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