हरिका द्रोणावल्ली : ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी
By: Team Aapkisaheli | Posted: 11 Jan, 2026
नई दिल्ली। भारतीय शतरंज की दुनिया में हरिका द्रोणावल्ली का नाम बेहद प्रतिष्ठा के साथ लिया जाता है। वह उन चुनिंदा महिला खिलाड़ियों में शुमार हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है।
हरिका द्रोणावल्ली का जन्म 12 जनवरी 1991 को गुंटूर, आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने श्री वेंकटेश्वर बाला कुटीर स्कूल में पढ़ाई की।
बेहद कम उम्र में शतरंज खेलने का अभ्यास शुरू करने वाली हरिका ने अंडर-9 नेशनल चैंपियनशिप में मेडल जीता था। इसके बाद उन्होंने अंडर-10 लड़कियों के लिए वर्ल्ड यूथ शतरंज चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। कोच एनवीएस रामाराजू ने बतौर खिलाड़ी निखारा।
हरिका ने 2012, 2015 और 2017 में महिला वर्ल्ड शतरंज चैंपियनशिप में तीन कांस्य पदक जीते। 2016 में, उन्होंने चीन के चेंगदू में फिडे महिला ग्रैंड प्रिक्स इवेंट जीता और फिडे महिला रैंकिंग में दुनिया में 5वीं रैंक पर पहुंचीं। वह 2024 में 45वें शतरंज ओलंपियाड में गोल्ड जीतने वाली महिला टीम का हिस्सा थीं।
हरिका 2025 में फिडे महिला विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं।
उपलब्धियों पर गौर करें तो हरिका ने 2003 में वुमन इंटरनेशनल मास्टर का खिताब जीता था। ये खिताब जीतने वाली एशियाई महाद्वीप की वह सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बनीं। 2004 में वुमन ग्रैंडमास्टर खिताब, 2007 में इंटरनेशनल मास्टर खिताब, और 2011 में ग्रैंडमास्टर खिताब उन्होंने जीता।
ग्रैंडमास्टर बनने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी थीं। 2009 में उन्होंने नेशनल विमेन चेस चैंपियनशिप, चेन्नई में गोल्ड मेडल जीता था। पिछले 16 साल में वह विमेन ए चैंपियनशिप, विमेन बी चैंपियनशिप, नेशनल जूनियर गर्ल्स और सब-जूनियर गर्ल्स टाइटल्स समेत नेशनल लेवल टूर्नामेंट्स में 16 मेडल जीत चुकी हैं।
ग्रैंडमास्टर बनने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी एस. विजयलक्ष्मी थीं। उन्होंने वर्ष 2001 में यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया था। हरिका को भारत सरकार ने साल 2007-08 के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया था। 2019 में, उन्हें खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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