Parenting Tips: बच्चों को कड़वी लगती है सही बातें, तो इस तरह करें प्रिपेयर
By: Team Aapkisaheli | Posted: 11 May, 2026
बच्चों की परवरिश करना जितना खूबसूरत अनुभव होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है। अक्सर माता-पिता बच्चों को सही और गलत का फर्क समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार बच्चों को ये बातें कड़वी या बुरी लगने लगती हैं। खासकर बढ़ती उम्र में बच्चे अपनी सोच और पसंद के अनुसार फैसले लेना चाहते हैं, ऐसे में टोका-टोकी या सलाह उन्हें पसंद नहीं आती। अगर सही तरीके से समझाया न जाए, तो बच्चे जिद्दी, चिड़चिड़े या बात न मानने वाले भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को सही बातें समझाने का तरीका बदला जाए। प्यार, धैर्य और समझदारी से दी गई सीख बच्चों पर ज्यादा असर डालती है।
डांटने की बजाय प्यार से समझाएंकई माता-पिता बच्चों की गलती पर तुरंत डांटने लगते हैं, जिससे बच्चे खुद को गलत समझने की बजाय डरने लगते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा आपकी बात समझे, तो उसे शांत और प्यार भरे तरीके से समझाना ज्यादा जरूरी है। जब बच्चे को महसूस होता है कि उसकी बात भी सुनी जा रही है, तो वह आपकी सलाह को आसानी से स्वीकार करता है। गुस्से में कही गई बातें अक्सर बच्चों के मन पर गलत असर डालती हैं, जबकि प्यार से समझाई गई बात लंबे समय तक याद रहती है।
बच्चों की भावनाओं को समझना भी जरूरीहर बच्चा अलग स्वभाव का होता है और उसकी सोचने-समझने की क्षमता भी अलग होती है। कई बार बच्चे किसी बात को लेकर परेशान या असुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन उसे खुलकर बता नहीं पाते। ऐसे में माता-पिता को उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए। अगर बच्चा किसी बात का विरोध कर रहा है, तो पहले उसकी वजह जानें। जब बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी भावनाओं की कद्र की जा रही है, तो वह सही बातें ज्यादा आसानी से स्वीकार करने लगता है।
खुद उदाहरण बनकर दिखाएंबच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता से सीखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अनुशासित और समझदार बने, तो सबसे पहले खुद वैसा व्यवहार करना जरूरी है। सिर्फ समझाने से ज्यादा असर तब होता है जब बच्चे आपको वही काम करते हुए देखते हैं। जैसे अगर आप बच्चों को गुस्सा न करने की सलाह देते हैं, तो खुद भी शांत व्यवहार अपनाएं। अच्छे संस्कार और सही आदतें बच्चों में धीरे-धीरे व्यवहार से ही आती हैं।
बच्चों को फैसले लेने की समझ देंबच्चों को हर समय सिर्फ आदेश देने की बजाय उन्हें सही और गलत का अंतर समझाना जरूरी होता है। उन्हें छोटे-छोटे फैसले लेने का मौका दें और उनके परिणाम भी समझाएं। इससे बच्चे खुद सोचने और समझने की आदत विकसित करते हैं। जब बच्चा अपनी गलतियों से सीखना शुरू करता है, तो वह सही बातों की अहमियत भी समझने लगता है। यह तरीका बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें जिम्मेदार भी बनाता है।
#7 कमाल के टिप्स: ऎसे संवारे लडके अपनी त्वचा...