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वाई शुड बॉयज हैव ऑल द् फन

By: Team Aapkisaheli | Posted: 20 Aug, 2012

वाई शुड बॉयज हैव ऑल द् फन
देश के छोटे शहरों में स्कूटर युवतियों और महिलाओं के लिए स्वतंत्रता का साधन बन गया, जबकि कुछ साल पहले तक वे स्कूल, कॉलेज या बाहर जाने केलिए परिवार के पुरूष सदस्यों पर निर्भर रहा करती थी। इसका मतलब यह हुआ कि कई महिलाएं नियमित रूप से घर बाहर नहीं जा पाती थीं।
इसकी वजह से उन्हें पढाई और कामकाज के मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पडता था। दोपहिया कम्पनियों, खासतौर से स्कूटी की कुल बिक्री में 70 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं की है और आज स्कूटी कहीं आने-जाने के लिए खास और पसंदीदा वाहन बन गई। यह व्हीकल भी है और एक्सेसरी भी। हर तरह की महिलाएं अपने हिसाब से बाहर निकलना चाहती हैं और स्कूटी उनकी खूब मदद करती है।
महानगरों में महिलाएं कई बार अपने मां-बाप की गाडी मांगती हैं या खुद खरीद लेती हैं, वहीं साधारण जीवनशैली, तंग गलियों, कम दूरी और सुरक्षित एवं विश्ववसनीय परिवहन विकल्पों की कमी से जूझने वाले ग्रामीण भारत में स्कू टी आवाजाही का लोकप्रिय जरिया बन गया है। इन छोटे शहरों के समाज में महिलाएं, पुरूषों की तुलना में काफी नीचे पायदान पर हैं, ऎसे में दोपहिया सवारी वहां महिलाओं की आजादी का चेहरा बन गई है।
आजकल स्कूटी की डिमांड हर ओर देखी जा रही है। ये नौकरी कर रही युवतियों के लिए किफायती है। इसके अलावा गियर ना होने, ऑटो चोक और इलेक्ट्रिक स्टार्ट की वजह से इसे चलाना बेहद आसान बनाते हैं। स्कूटी का डिजाइन कुछ इस तरह बनाया है कि पांच फुट की लडकी भी इसे आराम से चला सकती है। असके अलावा यह बाजार में उपलब्ल सबसे हल्का दोपहिया है। स्कूटीज इलेक्ट्रिक में स्टोरेज स्पेस, मोबाइल फोन चार्जर और लो बैटरी चार्ज इंडिकेटर भी है। चुनने केलिए 99 कलर और टारगेटेड एडवरटाइजिंग कैम्पेन के साथ हर युवती की स्कूटी केवल फैशन नहीं, बल्कि पर्सनलाइज्ड स्टेटमेंट बन गई। हर महीने स्कूटी की मार्केटिंग बढ रही है।
छोटे शहरों और कस्बों में उन्हें खूब आना-जाना पडता है, इसलिए स्कूटी की सेल बढ रही है। हालांकि, उनके सामने चुनौती भी है। सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव, व्यक्तिगत खर्च के लिए कम रकम और सुरक्षा की चिंता उन्हें तंग करती है। इसी तहर महिलाओं के लिए स्कूटी चलाना सीखना भी एक चुनौती है। स्कूटी ने महिलाओं की पूरी पीढी को रूढिवादी सोच और सलीके से उलट स्कूटर पर पीछे बैठने के बजाय स्कूटी की फ्रंट और ड्राइविंग सीट पर ला दिया है। दरअसल, युवतियों के जीने का अंजाद बदल गया है।

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