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बापू की अहिंसा बनी अध्ययन की नई राह

By: Team Aapkisaheli | Posted: 05 Oct, 2012

बापू की अहिंसा बनी अध्ययन की नई राह
महात्मा गांधी दुनिया के कई महान नेताओं के प्रेरणास्त्रेत रहे हैं। उनकी जिंदगी और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। आज के दौर में जब संघर्ष का दायरा व्यापक हुआ है तो उनके जीवन, विचारों और कार्यो की अहमियत और भी बढ जाती है। यही कारण है कि भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के और भी देशों में उनके विचारों को अध्ययन का विषय बनाया गया है विश्व में बढते आतंकवाद, हिंसा और विध्वंसात्मक गतिविधियों के बीच अहिंसा और शांति का दर्शन खासा लोकप्रिय हो रहा है। अक्सर कहीं सम्मेलन व कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं तो कहीं इसे जीवन दर्शन के रूप में ढालने की कोशिश की जा रही है। अहिंसा के दर्शन में नए सिरे से जान फूंकने का काम किया था महात्मा गांधी ने। उनके नेतृत्व में इस दर्शन की बढी लोकप्रियता और प्रासंगिकता के कारण ही आज इसे स्कूली व विश्वविद्यालयी शिक्षा में कोर्स का हिस्सा बनाया जा रहा है। इन सबको ध्यान में रखते हुए कई विश्वविद्यालयों में अहिंसा व शांति अध्ययन को लेकर उच्च शिक्षा के स्तर पर अलग कोर्स डिजाइन किया गया है। अभी तक विदेशों में इससे संबंधित कोर्स की पढाई अलग-अलग स्तर पर होती रही लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत में भी छात्रों का रूझान इस ओर बढा है।
देश के कई विश्वविद्यालयों ने इससे संबंधित अहिंसा व शांति अध्ययन को लेकर स्वायत्त रूप से पीजी सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एमए, एमफिल व पीएचडी कोर्स शुरू किया है। इन पाठ्यक्रमों का मकसद वैश्विक स्तर पर हिंसात्मक मनोवृत्ति को दृष्टि में रखकर गांधीवादी मूल्यों का संवर्धन व संरक्षण करना है। इसे विदेशों में चल रही पीस स्टडी के कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कई विश्वविद्यालयों ने स्त्रातक स्तर पर "रीडिंग गांधी" नाम से अलग से पेपर भी शुरू किया है। इन परिसरों में "अहिंसा और शांति अध्ययन" नाम से अलग सेंटर बनाए गये हैं, जहां इस दिशा में अध्ययन, अध्यापन और रिसर्च के काम हो रहे हैं।
एडमिशन
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चलाए जा रहे विभिन्न पाठयक्रमों में दाखिले के लिए हर साल राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। उसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। एमए तथा एमफिल में प्रवेश के लिए सामान्य व अन्य पिछडा वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत अंक व अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों के लिए 45 फीसद अंक के साथ स्त्रातक होना चाहिए। एमफिल में प्रवेश के लिए सामान्य व अन्य पिछडा वर्ग के छात्रों को स्त्रातकोत्तर में 55 फीसद तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का 50 फीसद अंक होना अनिवार्य है। प्रवेश परीक्षा में संबंधित विषय की सामान्य जानकारी से संबद्ध वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होते हैं।
संभावनाएं
एमए करने वाले छात्रों के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों में काम करने के काफी अवसर हैं। कोर्स के बाद रिसर्च करके या नेट उत्तीर्ण होकर अध्यापन के क्षेत्र में भी जा सकते हैं। इसके अलावा श्रीलंका, जापान तथा अन्य देशों में रिसर्च आदि के क्षेत्र में इस कोर्स के विशेषज्ञों की काफी मांग है। विशेषज्ञों की मानें तो इस क्षेत्र में आने अथवा इस कोर्स को करने वालों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें इसमें रूचि हो। इसके बगैर कुछ खास हासिल नहीं होने वाला है। यह कोर्स समर्पण और समाज सेवा के प्रति लगन की भी अपेक्षा करता है।
वेतन और रोजगार
शुरू में पीस एंड कॉन्फ्लक्ट में भी थोडी-बहुत मेहनत करनी पडती है। बावजूद इसके, 25 से 30 हजार रूपए मासिक आय हो जाती है। फिर भी संस्थान के बजट, स्टाफ और योग्यता के आधार पर बेहतरीन सैलरी मिल जाती है। हालांकि आप खुद का रोजगार भी शुरू कर सकते हैं और बतौर कंसल्टेंसी काम कर इस फील्ड में अपनी पहचान बना सकते हैं। समीक्षक, प्रोग्राम एसोसिएट्स/असिस्टेंट, एजुकेशन कोआर्डिनेटर, रिसर्च असिस्टेंट, पीआर सहित रीजनल मॉनीटर जैसे काम मिलते हैं। पीस और कॉçन्फ्लक्ट से जुडे विभिन्न मामलों को लेकर विस्तृत अध्ययन करने के बाद समुदायों के बीच जाकर भी काम कर सकते हैं। इसके अलावा, पॉलिसी रिसर्च, वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता, राजनयिक लॉबिंग, पब्लिक एजुकेशन, सामु दायिक से वा, इंटर-कल्चरल डिप्लोमेसी आदि में भी करियर बना सकते हैं ।
कोर्स
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स के तहत गांधी विचार, उनका जीवन, कार्य, हिन्द स्वराज संघर्ष को लेकर उनका दर्शन और संघर्ष समाधान के लिए उनके सिद्धांत आदि का अध्ययन होता है। अहिंसा एवं शांति अध्ययन में एमए कोर्स को चार भागों में बांटा गया है। इसके तहत पहली छमाही में छात्रों को अहिंसा अध्ययन की पृष्ठभूमि के बारे में बताया जाता है। इसके अलावा, ऎतिहासिक परिप्रेक्ष्य में हिंसा और अहिंसा की धर्मशास्त्रीय व्याख्या, राजनीतिक अर्थशास्त्र और संसाधनों पर नियंतण्रकी राजनीति, अस्मिता की राजनीति, जातीयता और राष्ट्रवाद आदि को लेकर विस्तार से बताया जाता है। दूसरी छमाही, में गांधी और अहिंसावादी राजनीति के सिद्धांत और व्यवहार, समाज वैज्ञानिक शोध-प्रविधि, शांति, विकास और संप्रेषण आदि के बारे में बताया जाता है। चौथी छमाही में मानव अधिकारों के बारे में र्चचा की जाती है। इसके अलावा, वैकल्पिक समूह के तहत अभ्युदय और विकास अवधारणा और राजनीति के बारे में अध्ययन कराया जाता है। कोर्स में युद्ध और नि:शस्त्रीकरण और अनुवाद आदि भी वैकल्पिक पत्र के तहत पढाये जाते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स में इससे जुडी आधारभूत बातें और इसके व्यावहारिक पक्ष से रू-ब-रू कराया जाता है।

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